investigation of the Aurangabad accident

रेलवे ने दिए औरंगाबाद हादसे की जांच के आदेश

नई दिल्लीः रेलवे ने औरंगाबाद में पटरियों पर सो रहे 16 प्रवासी श्रमिकों की मालगाड़ी से कटकर मौत की घटना की जांच का आदेश दिया है। कोविड-19 का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के कारण 20 श्रमिक पैदल ही महाराष्ट्र के जालना से मध्यप्रदेश जा रहे थे। रास्ते में थकने के कारण उनमें से 17 लोग ट्रेन की पटरियों पर आराम करने के लिए लेट गए जबकि तीन अन्य पास के खेत में बैठ गए। इसी दौरान तेज गति से जा रही मालगाड़ी से कट कर उनमें से 16 की मौत हो गई जबकि एक घायल हो गया।

इस घटना में पटरियों की गश्त करने वालों की भूमिका की जांच की जाएगी, क्योंकि उन्हें लॉकडाउन के दौरान लोगों को पटरियों से दूर रखने की जिम्मेदारी दी गई है। रेल मंत्रलय ने कहा, ‘दक्षिण मध्य र्सिकल के रेलवे संरक्षा आयुक्त राम कृपाल आज हुई श्रमिकों की मौत के मामले की स्वतंत्र जांच करेंगे। दक्षिण मध्य रेलवे के नांदेड़ रेलवे डिविजन के परभनी-मनमाड संभाग में श्रमिक मालगाड़ी से कट कर मर गए हैं।’  

हालांकि, रेलवे ऐसी दुर्घटनाओं को ‘रेल दुर्घटना’ की श्रेणी में नहीं रखती है और ट्रेन से कट कर मरने की घटनाओं को ‘अनाधिकार प्रवेश’ का मामला मानती है। लेकिन अतीत में कुछ घटनाएं ऐसी भी हुई हैं जब रेलवे ने मानवीय आधार पर ऐसी दुर्घटनाओं में मरने वालों के परिजन को अनुग्रह राशि दी है। रेलवे ने 2017 में मुंबई के एल्फिस्टन पुल गिरने के हादसे में मरे 23 लोगों के परिजन को पांच-पांच लाख रुपये, गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को एक-एक लाख रुपये जबकि अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि दी थी। औरंगाबाद वाले मामले में रेलवे ने अभी तक अनुग्रह राशि की घोषणा नहीं की है।