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केंद्र के फैसले से से नाराज हुए पंजाब के अफसर और किसान

चंडीगढ़: पंजाब सरकार के अधिकारी और किसान इस बात से बहुत हैरान हैं कि केंद्र सरकार ने सूखा दूध और मक्का को आयात करने की मंजूरी दे दी है, जबकि देश में हजारों टन सूखा दूध पड़ा है। भारत सरकार ने सूखे दूध और मक्का पर इम्पोर्ट ड्यूटी कम करके 15% कर दी है। आमतौर पर यह ड्यूटी 30 प्रतिशत से ज्यादा होती है। 

पंजाब सरकार के एक बड़े अधिकारी ने ‘दैनिक सवेरा’ को बताया के पंजाब मिल्कफैड के पास 11,000 टन सूखा दूध पड़ा है और राष्ट्रीय मार्कीट में इसको कोई लेने को तैयार नहीं है। इसका भाव 300 रुपए से कम होकर 220 रुपए प्रति किलो रह गया है। मक्के का तो इतना बुरा हाल है कि नवांशहर की मंडी में इसकी खरीद पिछले दिनों में 800 रुपए प्रति क्विंटल हुई है, जबकि इसकी मिनिमम सपोर्ट प्राइस 1800 रुपए प्रति क्विंटल है। किसानों का कहना है कि जब देश के पास ही मक्का इतना पड़ा है तब बाहर से इसको आयात की क्या जरूरत है। भारत सरकार ने 10,000 टन सूखा दूध और 5 लाख टन मक्का इंपोर्ट करने की मंजूरी दी है। 

सरकारी सूत्रों का कहना है अलग अलग राज्यों के पास हजारों टन सूखा दूध पड़ा है। शिक्षा विभाग को आदेश सूखा दूध बच्चों को मिड-डे मील के रूप दो पंजाब सरकार के अधिकारी ने कहा कि उन्होंने शिक्षा विभाग को कहा है कि यह सूखा दूध बच्चों को स्कूलों में मिड-डे मील के रूप में दिया जाना चाहिए क्योंकि राज्य के पास इतना सूखा दूध पड़ा है और यह बच्चों के काम आ जाएगा। आंध्र प्रदेश ने ऐसा किया है। पता चला है इसके बारे में पंजाब मिल्कफैड ने शिक्षा विभाग को पत्र भी लिखा है और इसके साथ ही सहकारिता मंत्री ने शिक्षा मंत्री के साथ बात की है।