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टिप्पणीः पोम्पेओ लगातार जोड़ रहे हैं अमेरिका में नैतिक दाग

अमेरिका के प्रतिबंध के चलते चिकित्सा सामग्री ईरान तक नहीं पहुंचायी जा सकती है। जिसके परिणामस्वरूप बेगुनाह लोग मर रहे हैं। हाल में अमेरिकी कनेक्टिकट स्टेट के सांसद क्रिस मुरपेइ ने सोशल मीडिया पर उपरोक्त वाक्य लिखे। उनका यह कहना बिलकुल सच्चाई है। महामारी के प्रकोप के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ ने अनेक बार कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ प्रतिबंध नहीं उठाएगा, जिससे ईरान की स्थिति और गंभीर रही।

स्थानीय समयानुसार 11 अप्रैल के दोपहर तक ईरान में कुल 70029 पुष्ट मामले हैं, जिन में 4357 लोगों की मौत हो चुकी है। ईरान में मृत्यु दर वैश्विक औसत स्तर से कहीं ऊँची है। ईरानी स्वास्थ्य अधिकारी का मानना है कि ईरान में ऊंची मृत्यु दर का मुख्य कारण अमेरिका के प्रतिबंध हैं। लेकिन अमेरिका के प्रतिबंध अभी भी जारी हैं। 26 मार्च को अमेरिकी वित्त मंत्रालय की वेबसाइट पर ईरान के 15 निजी व्यक्तियों और 5 उद्यमों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की खबर जारी की। साथ ही अमेरिका ने ईरान के आईएमएफ से 5 अरब डॉलर के कर्ज मांगने से रोकने की योजना भी बनायी है। विडंबना यह है कि पोम्पेओ ने 8 अप्रैल को कहा कि अमेरिका सहायता देना चाहता है, लेकिन ईरान ने इंकार कर दिया।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस ने हाल में अपील की कि यूरोप और अमेरिका आदि समृद्ध देशों की सरकारों और जनता संकट को दूर करने के साथ सहयोग कर दुनिया के अन्य स्थलों पर भी नजर रखनी चाहिए। चूंकि वायरस की कोई सीमा नहीं होती है। इस महामारी के मुकाबले में विजय पा सकेंगे या नहीं दुनिया में सब से कमजोर चिकित्सा व्यवस्था पर निर्भर है। हाल में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने अमेरिका से ईरान आदि देशों के खिलाफ प्रतिबंध हटाने की अपील भी की। अमेरिका में कुछ सांसदों ने भी अमेरिकी विदेश मंत्री और वित्त मंत्री लेकिन के नाम पत्र लिखकर अस्थायी रूप से ईरान के खिलाफ प्रतिबंध को कम से कम 120 दिनों के लिए हटाना चाहिए। लेकिन पोम्पेओ ने इसे नजरअंदाज किया। उन्होंने इसका कारण बताया कि विश्व का यह मानना है कि कोई भी प्रतिबंध मानवीय सहायता, चिकित्सा उपकरणों और दवाओं के ईरान में प्रवेश करने से रोक सकता है। क्या यह सच है? उनके बयान ने भूतपूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री थॉमस पिखरिंग के बयान का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि इतिहास से यह साबित हुआ कि अमेरिका द्वारा सशर्त चिकित्सा प्रतिबंध उठाने से बड़ी सहायता उन देशों में पहुंच सकती है, जिन्हें मदद देने की आवश्यक्ता है। 

मौजूदा महामारी मानव जाति के सामने आयी आम चुनौती है। जबकि अमेरिका द्वारा कुछ देशों के खिलाफ लगाये गये प्रतिबंधों से महामारी एक मानवतावादी संकट में बदल चुकी है। पोम्पेओ ने अनेक बार कहा था कि अमेरिका विश्व महामारी मुकाबले में पूंजी सहायता देगा, लेकिन अभी तक हम ने नहीं देखा कि अमेरिका ने इसे अंजाम दिया। लोगों ने साफ साफ देखा है कि अमेरिका के कुछ राजनेता अंतर्राष्ट्रीय महामारी मुकाबले के सहयोग को बर्बाद कर रहे हैं। जैसे कि डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस ने एक लेख में लिखा कि महामारी के प्रकोप में देशों के लिए अपने देश की जनता की रक्षा करना सब से महत्वपूर्ण है। लेकिन कठिन तथ्य है कि यदि वे लोग अविकसित देशों को सहायता नहीं देते, तो उन द्वारा अपने देश की स्वास्थ्य सुरक्षा की रक्षा करने का प्रयास भी अंततः विफल होगा। 
(साभार-चाइना रेडियो इंटरनेशनल, पेइचिंग)