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Holi day

होली के दिन भगवान हनुमान जी को चढ़ाएं चोला, बनेंगे सभी बिगड़े काम

जैसा के आप सभी जानते हैं की होली का त्यौहार 10 मार्च को मनाया जायेगा। ये त्यौहार सिर्फ रंगों का ही त्यौहार नहीं बल्कि आपस में रजिश मिटाने वाला त्यौहार भी माना जाता है। कहा जाता है की होली के दिन अगर भगवन हनुमान जी की पूजा या उनके उपाय किये जाएँ तो  हनुमानजी प्रसन्न हो कर आपकी मन चाही हर इच्छा पूरी करते हैं। इस दिन हनुमानजी को चोला चढ़ाने से हर बिगड़ा काम बन जाता है। आज हम आपको बताएंगे की होली के दिन हनुमान जी की पूजा किस प्रकार करें। 

होली के दिन शाम के समय हनुमानजी को केवड़े का इत्र व गुलाब की माला चढ़ाएं। हनुमानजी को प्रसन्न करने का ये बहुत ही अचूक उपाय है। इस उपाय से हर मनोकामना पूरी हो जाती है। इसके अलावा होली के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद बड़ के पेड़ से 11 या 21 पत्ते तोड़े लें।वहीं ध्यान रखें कि ये पत्ते पूरी तरह से साफ व साबूत हों। अब इन्हें स्वच्छ पानी से धो लें और इनके ऊपर चंदन से भगवान श्रीराम का नाम लिखें। इसके साथ ही अब इन पत्तों की एक माला बनाएं। माला बनाने के लिए पूजा में उपयोग किए जाने वाले रंगीन धागे का उपयोग करें। अब समीप स्थित किसी हनुमान मंदिर जाएं और हनुमान प्रतिमा को यह माला पहना दें। वहीं हनुमानजी को प्रसन्न करने का यह बहुत प्राचीन टोटका है। अगर आप पर कोई संकट है, तो होली के दिन नीचे लिखे हनुमान मंत्र का विधि-विधान से जप करेंः "ऊँ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा"

जप विधिः सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद अपने माता-पिता, गुरु, इष्ट व कुलदेवता को नमन कर कुश (एक प्रकार की घास) के आसन पर बैठें। पारद हनुमान प्रतिमा के सामने इस मंत्र का जप करेंगे, तो विशेष फल मिलता है। जप के लिए लाल हकीक की माला का प्रयोग करें। होली के दिन तेल, बेसन और उड़द के आटे से बनाई हुई हनुमानजी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा करके तेल और घी का दीपक जलाएं तथा विधिवत पूजन कर पूआ, मिठाई आदि का भोग लगाएं। इसके बाद 27 पान के पत्ते तथा सुपारी आदि मुख शुद्धि की चीजें लेकर इनका बीड़ा बनाकर हनुमानजी को अर्पित करें। इसके बाद इस मंत्र का जप करें- मंत्र- नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा। इसके अलावा फिर आरती, स्तुति करके अपने इच्छा बताएं और प्रार्थना करके इस मूर्ति को विसर्जित कर दें। इसके बाद किसी योग्य ब्राह्मण को भोजन कराकर व दान देकर ससम्मान विदा करें।