China

हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून से "एक देश, दो प्रणाली" की गारंटी होगी

मई के अंत में आयोजित चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा के पूर्णाधिवेशन में हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का निर्माण करने के बारे में निर्णय लिया गया। जो हांगकांग में "एक देश, दो प्रणाली" की गारंटी के लिए महत्वपूर्ण है। हांगकांग सौ साल तक ब्रिटिश उपनिवेशिक शासन के तहत रखा गया था। वर्ष 1997 में चीन सरकार ने हांगकांग में अपने शासन की बहाली की। इससे जुड़े चीन लोक गणराज्य के हांगकांग विशेष शासन क्षेत्र बुनियादी कानून में यह निर्धारित है कि हांगकांग विशेष शासन क्षेत्र को देश को विद्रोह करना प्रतिबंध लगाने के लिए कानून का निर्माण करना चाहिए। लेकिन चीन विरोधी शक्तियों के द्वारा बाधा डालने के कारण हांगकांग में यह कानून स्थापित नहीं किया जा सका।

गत वर्ष से कई महीनों के लिए चले उपद्रव से हांगकांग की सड़कों में प्रहार, मारपीट और आगजनी की निरंतर कार्यवाहियां चलती रही हैं। विद्रोहियों ने एक देश में दो व्यवस्थाओं के खिलाफ चुनौतियांरचीं। चीनी हांगकांग व मकाओ अनुसंधान संघ के उप प्रधान ल्यूचाओच्या ने कहा कि हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की स्थापना का उद्देश्य हांगकांग में हुए उपद्रव से सारे देश की सुरक्षा के खिलाफ धमकी से बचना है। इस का सिगनल है कि चीन सरकार किसी भी कीमत पर अपनी प्रभुसत्ता और सुरक्षा की रक्षा करेगी।

हांगकांग में विभिन्न जगतों के व्यक्तियों ने चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा के निर्णय का स्वागत किया है। उन का मानना है कि यह निर्णय हांगकांग के लोगों के मूल हितों के अनुकूल है। हांगकांग विशेष शासन क्षेत्र की प्रमुखअधिकारी कैरीलैम ने कहा कि हांगकांग विशेष शासन क्षेत्र की सरकार राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा की स्थायी कमेटी केकानून निर्माण का समर्थन करेगी और समाज की विभिन्न जगतों को इस कानून निर्माण का महत्व समझाएगी। हांगकांग में विभिन्न जगतों के सूत्रों ने भी अपने वक्तव्यों में राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि के निर्णय को समर्थन प्रकट किया।

उधर विश्व के मुख्य मीडिया ने चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा के निर्णय की रिपोर्टिंग की। रूस, पाकिस्तान, वियतनाम और ईरान आदि देशों ने चीन के निर्णय का साथ देकर कहा कि हांगकांग सवाल चीन का आंतरिक मामला है और वे विदेशी बलों से एक चीन के सिद्धांत को बदलने का विरोध करते हैं। लेकिन अमेरिका सहित कुछ पश्चिमी देशों ने चीन के आंतरिक मामलों में अशिष्ट रूप से हस्तक्षेप लगाया। अमेरिकी विदेश मंत्री माइकपोम्पिओ ने हांगकांग के विशेष स्थान को रद्द करने की धमकी दी।

28 मई को अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा चार देशों के विदेश मंत्रियों ने अपने संयुक्त वक्तव्य में चीन की आलोचना की। लेकिन अमेरिकामें खुद के बीस से अधिक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कानून स्थापित हैं। इन पश्चिमी देशों ने हांगकांग सवाल पर दोहरा मापदंड अपनाकर हांगकांग को अपने राजनीतिक दायरे में संरक्षित करने की कोशिश की।

विश्लेषकों का मानना है कि हांगकांगमेंराष्ट्रीयसुरक्षाकानूनकानिर्माण करने से इतिहास में संपन्न उपनिवेशवादी प्रभाव को दूर किया जाएगा और कानूनी तौर पर हांगकांग सवाल के हवाले से चीन की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली शक्तियों के लिए लाल रेखा रेखांकित की गयी है। और हांगकांगमेंराष्ट्रीयसुरक्षाकानून से हांगकांग में विदेशी निवेश के हितों की रक्षा की जाएगी और इससे हांगकांग के अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के स्थान पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(साभार-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)