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टिप्पणी:मास्क लूटने से अमेरिका का "राष्ट्रीय स्वार्थ" साबित हुआ

अमेरिकी मीडिया ने हाल ही में मास्क को लेकर हो रही होड़ को "मास्क युद्ध" कहा और यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिका ने कई बार दूसरे देशों के हाथ से मास्क के विक्रय को रोक दिया है।  हाल ही में जर्मनी द्वारा चीन से खरीदे गये कुछ मास्क को अमेरिका ने रोक दिया और अपने देश में वापस लाया। जर्मनी के संघीय सांसद एंड्रेयस जीजल ने इसे आधुनिक काल की डकैती बतायी। उधर फ्रांसिसी मीडिया की रिपोर्ट है कि अमेरिका ने फ्रांस द्वारा आयातित कुछ मास्क को भी रास्ते में रोक कर लूट किया है। अमेरिका के अनेक मित्र देशों ने यह शिकायत की है कि अमेरिका अधिक दाम देने या प्रत्यक्ष निरोध करने के माध्यम से चिकित्सा सामग्रियों को लूट रहा है। उधर, अपने आयात की गारंटी के लिए जर्मनी ने सैन्य विमान की आड़ में चिकित्सा सामग्रियों का परिवहन करना शुरू कर दिया है। और ब्राजील ने भी सैन्य विमान से चीन से आयातित चिकित्सा सामग्रियों का परिवहन किया। 

इसके साथ ही अमेरिका ने रक्षा उत्पादन कानून के मुताबिक अपनी चिकित्सा सामग्रियों के निर्यात को रोक दिया है। अमेरिकी सरकार ने 3एम कंपनी को कनाडा और लातीन अमेरिका में मास्क के निर्यात को मना कर दिया है। इसके प्रति अमेरिका के मित्र देशों ने निराशा प्रकट की। कनाडा के ओंटारियो गवर्नर ने कहा कि हम बहुत निराश हैं, क्योंकि अमेरिका ने उत्तरी अमेरिकी परिवार के एक भाग को त्याग दिया है। महामारी की रोकथाम में कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञों का स्वार्थवादी रुख दिख रहा है। और इससे "अमेरिका फर्स्ट" का असली अर्थ भी साफ-साफ पता लग गया है। यानी सभी अंतर्राष्ट्रीय नियमों को अमेरिका के हितों के तहत रखना चाहिये।  

महामारी फैलने के बाद अमेरिका ने अपने मित्र देशों को निरंतर दबाव में रखा है। अमेरिका ने सैन्य विमानों से इटली से जांच अभिकर्मक वापस लिये और दर्जनों अरब डॉलर से जर्मन कंपनी द्वारा अनुसंधान किये गये टीका तकनीक को हड़पना चाहा। अमेरिका की स्वार्थ कार्रवाइयों से अमेरिका और यूरोप के बीच ट्रान्साटलांटिक साझेदारी में एक नई दरार खोली गयी है। यूं तो यूरोप संघ की परिषद के पूर्व अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क ने कहा, "अगर हमारे पास अमेरिका जैसे दोस्त हैं, तो दुश्मन की क्या जरूरत है? "
(साभार-चाइना रेडियो इंटरनेशनल, पेइचिंग)