Pompeo

पोम्पेओ जैसे अमेरिकी राजनीतिज्ञ अमेरिकी जनता को किस दिशा में ले जाएंगे

4 जुलाई को अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस था। लेकिन इस से पहले क्रमशः तीन दिनों में अमेरिका में रोज 50 हजार से अधिक पुष्ट मामले सामने आये हैं। इस के साथ अमेरिका के अनेक स्थलों में नस्लीय भेदभाव और हिंसक प्रशासन के विरोध में प्रदर्शन गतिविधियां हुई हैं। प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच संघर्ष होते रहे। जैसे कि अमेरिकी मीडिया ने कहा कि इस साल अमेरिका का स्वतंत्रा दिवस बहुत खास है, जिसका सरकार की नीतियों से प्रत्यक्ष संबंध है। अमेरिकी नेटीजनों ने पोम्पेओ का प्रतिनिधित्व करने वाले अमेरिकी राजनीतिज्ञों को गाड़ी चलाते समय सोते हुए ड्राइवर भी बताया। चूंकि वे नहीं जानते कि अमेरिका को किस दिशा में ले जा रहे हैं। 

वास्तव में अमेरिका में हुई महामारी और नस्लीय भेदभाव आदि सवालों का निपटारा करते समय पोम्पेओ जैसे अमेरिकी राजनीतिज्ञ बहरे होने का नाटक करते हैं और कुछ भी नहीं करते हैं। जबकि विदेशी मामलों में वे तुरंत बार-बार झूठ बोलने वाली मशीन में बदलते हैं। हाल में उन्होंने फिर एक बार चीनी सत्तारुढ़ पार्टी की निंदा की और सीपीसी पार्टी और चीनी जनता के बीच संबंध को तोड़ने की कुचेष्टा की। उन्होंने चीन को विश्व की धमकी भी कही। जिससे उन के शीत युद्ध की विचारधारा प्रतिबिंबित होती है। 

विश्व की सब से बड़ी सत्तारुढ़ पार्टी की हैसियत से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने करीब सौ वर्षों के संघर्ष में चीनी जनता के हितों की रक्षा की और चीनी जनता का गहरा विश्वास प्राप्त किया है। कोविड-19 के मुकाबले में चाहे छोटे बच्चा हो या बुजुर्ग व्यक्ति का चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने पूरा उपचार करने की कोशिश की है। विश्व की सब से बड़ी पीआर कंसल्टिंग फर्म एडलमन पब्लिक रिलेशन्ज वल्डवाइड द्वारा मार्च में जारी एक जांच रिपोर्ट से जाहिर है कि चीन सरकार के प्रति चीनियों की विश्वास दर 90 प्रतिशत तक पहुंची है, जो क्रमशः तीन वर्षों में विश्व के पहले स्थान पर रहा है। सिंगापुर की एक जांच संस्था द्वारा मई माह में जारी रिपोर्ट से जाहिर है कि महामारी की रोकथाम में चीनी नागरिकों का संतोष सबसे ऊँचा है, जबकि अमेरिकी नागरिकों का संतोष चीन का आधे से भी कम है। जर्मनी सर्वेक्षण संस्था की जून माह की जांच से पता चला है कि 92 प्रतिशत देशों के लोगों ने माना कोविड-19 का निपटारा करने में अमेरिका की तुलना में चीन बेहतर है।

घरेलू महामारी की स्थिति पर नियंत्रित करने के बाद चीन दूसरों को रोकथाम और उपचार के अनुभवों को साझा करने की कोशिश की और अन्य देशों को भारी मदद भी दी। जबकि विश्व के समुन्नत चिकित्सक और अनुसंधान स्तर होने वाले अमेरिका ने क्या किया? पोम्पेओ जैसे अमेरिकी राजनीतिज्ञों ने डब्ल्यूएचओ से हटाने का निर्णय लिया, महामारी के बहाने से गैरकानूनी आप्रवासियों को वापस भेजा, जिससे वायरस को निर्यात किया गया है। हाल में अमेरिका ने कोविड-19 का उपचार करने वाली करीब सभी रेमडेसिविर  दवा को खरीदा और अमेरिकन फर्स्ट की नीति लागू की, जिसकी निंदा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने की। निसंदेह अमेरिकन फर्स्ट ही वैश्विक महामारी रोधी सहयोग को सच्ची धमकी है।
(साभार-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)