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Hukamnama

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 27 फरवरी

सलोक मः ३ ॥ नानक गिआनी जगु जीता जगि जीता सभु कोइ ॥ नामे कारज सिधि है सहजे होइ सु होइ ॥ गुरमति मति अचलु है चलाइ न सकै कोइ ॥ भगता का हरि अंगीकारु करे कारजु सुहावा होइ ॥

हे नानक! ज्ञानवान मनुख ने संसार के (माया के मोह को) जीत लिया है, (और ज्ञान के बिना) हरेक मनुख को संसार ने जीता है, (ज्ञानी के )असली करने वाले काम (भाव-मनुख जनम को सवारने वाले काम) की सफलता नाम जपने से ही होती है उस को यह लगता है की जो कुछ हो रहा है, प्रभु की रजा में हो रहा है। सतगुरु की बुद्धि पर चलने से (ज्ञानी मनुख की) बुद्धि पक्की हो जाती है, कोई (माया-आदिक विहार) उस को डुला नहीं सकता (उस को निश्चय होता है की) प्रभु भगतों का साथ निभाने से (उनका हरेक काम) रास हो जाता है।