Hukamnama, हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 7 जून

तिलंग महला ४ ॥ हरि कीआ कथा कहाणीआ गुरि मीति सुणाईआ ॥ बलिहारी गुर आपणे गुर कउ बलि जाईआ ॥१॥ आइ मिलु गुरसिख आइ मिलु तू मेरे गुरू के पिआरे ॥ रहाउ ॥ हरि के गुण हरि भावदे से गुरू ते पाए ॥ जिन गुर का भाणा मंनिआ तिन घुमि घुमि जाए ॥२॥

हे गुरसिख! मित्र गुरु ने (मुझे) परमात्मा की सिफत सलाह की बातें सुनाई हैं। मैं अपने गुरु से बार बार सदके कुर्बान जाता हूँ।१। हे मेरे गुरु के प्यारे सिख! मुझे आ के मिल, मुझे आ के मिल ।रहाउ। हे गुरसिख! परमात्मा के गुण (गाने) परमात्मा को पसंद आते हैं। मेने वेह गुण गाने, गुरु से सीखे हैं। मैं उन बड़े भाग्य वालो से बार बार कुर्बान जाता हूँ, जिन्होंने गुरु के हुकम को मीठा कर के माना है।२।