Hukamnama, हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 10 जून

सलोक मः ५ ॥ कोटि बिघन तिसु लागते जिस नो विसरै नाउ ॥ नानक अनदिनु बिलपते जिउ सुंञै घरि काउ ॥१॥ मः ५ ॥ पिरी मिलावा जा थीऐ साई सुहावी रुति ॥ घड़ी मुहतु नह वीसरै नानक रवीऐ नित ॥२॥

जिस मनुख को परमात्मा का नाम बिसर जाता है उस को करोड़ों विघन आ घेरते हैं। हे नानक! (ऐसे व्यक्ति) हर रोज ऐसे बिलकते हैं जैसे सूने घर में कांव रोता हैं (परन्तु उस घर में कुछ मिलता नहीं) ॥1॥ वोही रुत सुंदर हैं जब प्यारे प्रभु-पति का मेल होता है, सो, हे नानक! उस को हर समय याद करें, कभी घडी दो घडी भी वह प्रभु न भूले॥२॥