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टिप्पणी : कब तक छिपाना चाहते हैं अमेरिकी राजनेता

मुझे संदेह है कि कोविड-19 से संक्रमित था, लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिका का पहला मामला जनवरी में आया था। लेकिन पहले मुझे फ्लू हुआ था, लेकिन इतना गंभीर नहीं था। मुझे लगा कि मैं मर जाऊंगा। हाल में अमेरिकी न्यू जर्सी स्टेट के बेलव्यू शहर के मेयर माइकल मेलहेम की इस बात ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का व्यापक ध्यान खींचा है। यह इस बात का द्योतक है कि अमेरिका में पहला मामला और दो महीनों पहले ही आ गया है।
हाल में अमेरिका में कोविड-19 के पुष्ट मामलों और मृत मामलों की संख्या विश्व के पहले स्थान पर रहा, जबकि अमेरिकी राजनेताओं ने महामारी की रोकथाम में मेहनत नहीं की और संबंधित जानकारी छिपाने की लगातार कोशिश की।
आखिरकार अमेरिकी राजनेता कब तक छिपाना चाहते हैं?
पहला संदेह, अमेरिका में पहला पुष्ट मामला कब आया है। क्या गत सितम्बर माह में अमेरिका में कम्युनिटी फैलाव हो चुका था?
दूसरा संदेह, अमेरिका में कितने पुष्ट मामले और मृत मामले हैं? फरवरी माह के अंत में व्हाइट हाउस ने अमेरिकी अधिकारियों और स्वास्थ्य विभागों से मांग की कि महामारी की स्थिति की जानकारी देने से पहले उप राष्ट्रपति के दफ्तर की अनुमति पाने की जरूरत है।
तीसरा संदेह, अमेरिका सरकार ने वैज्ञानिकों के सार्वजिनक बोलने पर पाबंदी लगायी है। क्यों अमेरिकी राजनेता अपने देश के वैज्ञानिकों से डरते हैं? 
चौथा संदेह, विश्व का सबसे विकसित देश होने के नाते अमेरिका में महामारी-रोधी सामग्रियों की खरीदारी और वितरण क्यों अविकसित देशों की तरह अव्यवस्थित है?
अमेरिका में महामारी के मुकाबले के लिए मूल्यवान समय इसी तरह बर्बाद हो चुका है। लोगों ने साफ-साफ देखा कि अमेरिकी राजनेताओं ने बार-बार महामारी की जानकारी छिपाने की कोशिश की, जिसका मकसद अपने प्रशासन की असमर्थता और गैर-जिम्मेदारी रवैया को छिपाना है। यही कारण है कि विश्व के सबसे समुन्नत चिकित्सक व तकनीक स्तर होने वाले अमेरिका में कोविड-19 की सबसे गंभीर स्थिति है। जब मासूमों की जान चली गई, तो क्या स्वार्थ वाले अमेरिकी राजनेता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए?
 (साभार-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)