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हांगकांग संबंधी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पूरी तरह से “एक देश, दो व्यवस्थाएं” नीति के अनुकूल : ब्रिटेन में चीनी राजदूत

ब्रिटेन स्थित चीनी राजदूत ल्यो श्याओ मिंग ने 6 जुलाई को कहा कि हांगकांग संबंधी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पूरी तरह ‘एक देश, दो व्यवस्था’ नीति के अनुकूल है और इस नीति की दीर्घकालिक स्थिरता को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने बल दिया कि हांगकांग चीन का भाग है। हांगकांग मामला चीन का आंतरिक मामला है। किसी भी विदेश को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।

 ल्यो श्याओ मिंग ने उसी दिन ब्रिटेन स्थित चीनी दूतावास में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये एक संवादाता सम्मेलन में हांगकांग संबंधी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के बारे में चीन सरकार के पक्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हांगकांग संबंधी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून राष्ट्र के स्तर पर हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने पर कानून निर्माण कर कानूनी व्यवस्था और कानूनी कार्यांवयन को संपूर्ण बनाया, जो जनता की अभिलाषा के अनुकूल और अनिवार्य भी है। 

उन्होंने यह भी कहा कि यह कानून न सिर्फ पूरी तरह ‘एक देश, दो व्यवस्था’ की नीति के अनुकूल है, बल्कि वह सुनिश्चित करेगा कि ‘एक देश, दो व्यवस्था’ नीति लंबे समय तक स्थिर रहेगी। इस कानून के शुरू में कहा गया है कि ‘एक देश, दो व्यवस्था’, हांगकांग वासियों के हांगकांग पर प्रशासन और उच्च स्वायत्त की नीति को सुदृढ़ता से चौतरफा लागू किया जाता है। ‘एक देश, दो व्यवस्था’ नीति एक समग्र धारणा है।एक देश इस नीति की पूर्वशर्त है और दो व्यवस्था एक देश के अधीन है। महज एक देश सुरक्षित है तो दो व्यवस्थाओं को गारंटी मिलती है।

राजदूत ल्यू ने आगे कहा कि हांगकांग में ‘एक देश, दो व्यवस्था’ को चुनौती देने और नष्ट करने की गतिविधि हुई है। हांगकांग संबंधी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का उद्देश्य एक देश के प्राधिकार की सुरक्षा करना और अंत में ‘एक देश, दो व्यवस्था’ पर कायम रहना और उसे संपूर्ण करना है, न कि उसे बदलना है।

उन्होंने कहा कि हांगकांग संबंधी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून से केंद्रीय सरकार के संपूर्ण प्रबंधन व शासन अधिकार और हांगकांग के उच्च स्वायत्त की एकता जाहिर हुई है। यह कानून हांगकांग में पूंजीवादी व्यवस्था, और हांगकांग की उच्च स्वायत्त व कानून व्यवस्था को नहीं बदलेगा, और हांगकांग के प्रशासनिक अधिकार, कानून निर्माण अधिकार, स्वतंत्र विधि अधिकार और अंतिम फैसले के अधिकार पर भी प्रभाव नहीं डालेगा।

राजदूत ल्यू ने कहा कि ब्रिटिश पक्ष ने चीन ब्रिटेन संयुक्त ब्यान और ‘एक देश, दो व्यवस्था’ नीति में गड़बड़ी मचाकर चीन पर अंतरराष्ट्रीय कर्तव्य लागू नहीं करने का आरोप लगाया। यह एकदम गलत है। उन्होंने कहा कि ‘एक देश, दो व्यवस्था’ नीति के बारे में चीन की नीति हांगकांग बुनियादी कानून में प्रतिबिंबित है और पूरी तरह लागू हुई है। इस तरह यह सवाल मौजूद नहीं है कि तथाकथित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ने चीन के अंतरराष्ट्रीय कर्तव्य का उल्लंघन किया है।


ल्यू श्याओ मिंग ने संवाददाता सम्मेलन में खास तौर पर बल दिया कि हांगकांग की वापसी के बाद ब्रिटेन को हांगकांग पर प्रभुसत्ता, प्रशासन अधिकार और निगरानी अधिकार नहीं है। लेकिन ब्रिटिश सरकार निरंतर तथाकथित हांगकांग सवाल पर आधे साल की रिपोर्ट जारी कर हांगकांग मामले पर टिप्पणी करती है। 
वर्तमान में उसने हांगकांग संबंधी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पर भी निराधार आरोप लगाया। यह चीन के आंतरिक मामले में उद्दंततापूर्ण हस्तक्षेप है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी नियमों को खुलेआम पैरों तले रौंदना है। चीन इसके प्रति जबरदस्त असंतोष और डटकर विरोध करता है। 

उन्होंने कहा कि हांगकांग चीन का हांगकांग है, हांगकांग मामला चीन का आंतरिक मामला है। किसी भी विदेश को इसमें दखलदाजी करने का अधिकार नहीं है। हांगकांग संबंधी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का एक मुख्य कार्य विदेश या बाहरी शक्ति के साथ सांठ-गांठ कर हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा पर नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई की रोकथाम, नियंत्रण और सज़ा दी जाती है। किसी भी को चीन का राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास हित बनाए रखने का संकल्प कम नहीं समझना चाहिए। हांगकांग संबंधी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के कार्यांवयन का विरोध करने वाली किसी भी कार्रवाई को 140 करोड़ चीनी जनता का दढ़ विरोध मिलेगा और ऐसी कार्रवाई निश्चय ही विफल होगी। (साभार---चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)