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फ्रांसीसी विद्वानः कोविड-19 को दूर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग एकमात्र तरीका

डेविड गोसे चीन-यूरोप संयुक्त मंच के संस्थापक और चीन के जाने-माने फ्रांसीसी विशेषज्ञ हैं। एक पश्चिमी विद्वान के रूप में, उन्होंने कोविड-19 के खिलाफ चीन की लड़ाई की पूरी प्रक्रिया का अनुभव किया है। जब चीन में कोरोना वायरस फैला, तो डेविड गोसे चीन के शांगहाई में थे। सुरक्षा की दृष्टि से वे शांगहाई में ही रहे। उन्होंने कहा कि चीनी सरकार की गतिशीलता क्षमता और चीनी लोगों की एकता ने उस पर गहरी छाप छोड़ी। खासकर दुनिया के अन्य हिस्सों की स्थिति की तुलना में चीन के संकट जुटाने की क्षमता अद्वितीय है। चीन ने महामारी के खिलाफ "महान दीवार" बनायी है। 

फरवरी के अंत से, महामारी दुनिया के अन्य हिस्सों में फैल गयी, विशेष रूप से यूरोप व अमेरिका में। मास्क और वेंटिलेटर जैसी चिकित्सा आपूर्ति तेजी से एक वैश्विक कमी बन गई है। दुनिया के सबसे बड़े मास्क उत्पादक देश एवं चिकित्सा सामग्री के एक प्रमुख निर्यातक के रूप में, चीन ने उत्पादन में वृद्धि की है और महामारी से प्रभावित देशों को चिकित्सा आपूर्ति और अनुभवी चिकित्सा टीमों को भेजा। लेकिन, इन कार्यों की व्याख्या कुछ पश्चिमी देशों ने चीन के "मास्क कूटनीति" के रूप में की थी,जिसमें कहा गया था कि इसके छिपे चीन के भूराजनीतिक इरादा छिपा है। 

 डेविड गोसे इससे असहमत दिखते हैं। उन्होंने कहा,यह संदेह बिल्कुल गलत है। यह एक उदार कार्य है। संकट के शुरुआती दिनों में, कई देशों ने चीन की मदद की, और चीन ने वापस भुगतान किया। कोई मास्क कूटनीति नहीं है।
साथ ही डेविड गोसे ने कहा कि कोरोना वायरस पूरी दुनिया के सामने एक संकट है। इस लड़ाई को जीतने के लिए, सहयोग ही एकमात्र विकल्प है।
(साभार-चाइना रेडियो इंटरनेशनल, पेइचिंग)