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Pregnancy के दौरान अगर आप भी हैं Depression का शिकार तो बच्चे को हो सकता है ये बड़ा नुकसान

महिलाओं के जीवन में सबसे खूबसूरत एहसास होता है प्रेगनेंसी। प्रेगनेंसी के दौर में महिलाओं को बहुत से मुश्किल पड़ावों से भी हो कर गुज़ारना पड़ता है जैसे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक में जो भी बदलाव होतें हैं। सबसे सामान्य जो हर महिला उस तनाव महसूस करती है उसकी वजह होती है हार्मोन में बदलाव होना। जिसकी वजह से तनाव बड जाता है और महिलाएं डिप्रेशन में रहने लगती हैं। जिसका सीधा असर बच्चे और महिलाओं के शरीर पर पड़ता हैं। सबसे पहले बच्चे को असर ये पड़ेगा की बच्चे की इम्यूनिटी कमज़ोर हो जाएगी। आज हम आपको बताएंगे के आपको प्रेग्नेंसी में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे बच्चे पर किसी तरह का बुरा असर न पड़े। 

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स्तनपान : बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए सबसे पहले तो स्तनपान एक शानदार तरीका है। इसमें सभी प्रकार के प्रोटीन वसा मौजूद होते हैं जो स्वस्थ रहने के लिए जरूरी होते हैं। स्तनपान से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है। डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला का कहना है कि हरी सब्जियों में विटामिन ए, बी, सी, आयरन, कैल्शियम और फाइबर जैसे तत्व भरपूर होते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए फल और सब्जी जैसे सेब, गाजर, ब्रोकली, कीवी, खरबूजे, नारंगी और स्ट्रॉबेरी को आहार में शामिल करें।

इम्यूनिटी कम होने से खतरा: शोधकर्ताओं ने कहा कि इम्यूनिटी यानी बीमारियों से लडऩे की ताकत कम होने से शिशुओं को सांस संबंधी या गैस्ट्रोइंटेस्टिनल इन्फैक्शन के साथ-साथ अस्थमा और एलर्जी का खतरा होता है और इससे अवसाद, मोटापा व मधुमेह जैसे ऑटोइम्यून रोगों का खतरा बढ़ सकता है।

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18 घंटे की नींद जरूरी: नवजात शिशु के लिए 18 घंटे की नींद जरूरी है। फिर उम्र के आधार पर एक दिन में 10 से 14 घंटे की नींद बच्चे के लिए आवश्यक है। विटामिन डी भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है इसलिए बच्चों को धूप में बैठाना जरूरी है ताकि पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिल सके। बेहतर होगा कि एंटी-बायटिक ज्यादा न दें। इन दवाओं का अधिक इस्तेमाल इम्यून सिस्टम को कमजोर बनाता है।