abled youth apply reservation

शैक्षणिक पदों के लिए दिव्यांग युवाओं की मांग, नौकरियों में लागू कराएं आरक्षण

शिमलाः शैक्षणिक पदों के लिए पात्र दिव्यांग युवाओं ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मांग की है कि स्कूलों, पॉलिटेक्निक संस्थानों और महाविद्यालयों में दिव्यांगों के लिए नौकरियों में 4% आरक्षण लागू कराया जाए। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार विकलांगजन अधिकार कानून 2017 के प्रावधानों का उल्लंघन कर रही है। पत्र लिखने वाले सभी दिव्यांग युवा डिसेबल्ड स्टूडेंट्स एंड यूथ एसोसिएशन (डीएसवाईए) से जुड़े हैं।

डीएसवाइए के संयोजक मुकेश कुमार और सह- संयोजक सवीना जहाँ ने बताया कि उच्च शिक्षित  दिव्यांग युवाओं ने मजबूरी में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है।  उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से सरकार ने  स्कूलों में जेबीटी, टीजीटी, पीजीटी, एलटी और शास्त्री; पॉलीटेक्निक संस्थानों में लेक्चरर और महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर दिव्यांगों को 4% आरक्षण देना बंद कर दिया है।  

पिछले 3 वर्षों में स्कूलों से लेकर महाविद्यालय तक में शिक्षकों के सैकड़ों पद विज्ञापित किए गए। लेकिन दिव्यांगजनों को कहीं पर भी आरक्षण नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, "हम बार-बार शिक्षा विभाग के चक्कर काटते हुए थक चुके हैं। लेकिन आला अधिकारी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है।  हाल ही में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दिव्यांगों को 4% आरक्षण तब तक नहीं दिया जा सकता जब तक उनके लिए पद चिन्हित न कर लिए जाएं। और पद चिन्हित  करने का काम अभी तक नहीं हुआ है।"

मुकेश कुमार और सवीना जहां ने कहा कि सरकार दिव्यांगजनों के साथ लगातार भेदभाव कर रही है। जब पिछले कानून के अनुसार उन्हें 3% आरक्षण दिया जाता था, टीजीटी और पीजीटी पदों पर लोक सेवा आयोग के माध्यम से उनकी सीधी भर्ती नहीं की जाती थी। उन्हें बैच वाइज भर्ती दी जाती थी। जबकि सामान्य वर्ग के पद 50% बैच वाइज और इतने ही सीधी भर्ती से भरे जाते थे। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को बताया कि उच्च शिक्षित दिव्यांग युवा अत्यंत पिछड़े क्षेत्रों और कमजोर आर्थिक वर्ग से आते हैं। उन्होंने बहुत संघर्ष के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त की है।  लेकिन सरकार न सिर्फ उन्हें नौकरियों में आरक्षण के प्रावधान से वंचित कर रही है बल्कि उनके जीवन जीने के अधिकार पर भी चोट कर रही है।