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हिमाचल में शराब पर लगा कोविड सैस

हिमाचल  में शराब महंगी हो गई है। प्रदेश सरकार ने कोरोना से जंग में जारी लॉकडाउन के चलते अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान की भरपाई के लिए शराब पर कोविड-19 सैस लगा दिया है। हालांकि दिल्ली व आंध्र प्रदेश की तर्ज पर सरकार ने शराब पर भारी भरकम कोविड सेस नहीं लगाया, बावजूद इसके देसी, अंग्रेजी, आयातित सभी तरह की शराब व बीयर पर भी प्रति बोतल के हिसाब से सैस सरकार ने लगाया है। 

शराब पर कोविड सेस लगाने के साथ साथ सरकार ने सेनेटाइजेशन उत्पाद बनाने में काम आने वाले स्प्रिट पर भी आयात शुल्क को बढ़ाने का फैसला लिया है। प्रति बोतल शराब पर कोविड सेस लगाने के सरकार के फैसले से खजाने में करोड़ों की राशि आएगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर कीअध्यक्षता में शुक्रवार को प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक हुई। 

मंत्रिमंडल की अहम बैठक में शराब पर कोविड सेस लगाने का फैसला लिया गया। फैसले के मुताबिक देसी शराब पर प्रति बोतल 5 रु पए, देश में बनी अंग्रेजी शराब पर 10 रुपए प्रति बोतल, इंडियन मेड बीयर पर 5 रुपए प्रति बोतल, आयातित शराब पर प्रति बोतल 25 रुपए, आयातित बीयर पर 10 रुपए प्रति बोतल, वाइन पर 25 रुपए कोविड सेस लेगा। शराब पर कोविड सेस लगाने के साथ साथ सरकार ने लॉकडाउन की वजह से आर्थिकी को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सेनेटाइजेशन उत्पाद बनाने में काम आने वाले आयातित स्प्रिट पर साढ़े दस रुपए प्रति बल्क लीटर के स्थान पर 15 रुपए शुल्क लेने का फैसला लिया। जीएसटी के अलावा आबकारी विभाग सरकार का कमाऊ पूत है। 

बीते माली साल में शराब की बिक्री से करीब 1700 करोड़ का राजस्व खजाने में आया। चालू माली साल में शराब की बिक्री से 1840 करोड़ का राजस्व जुटाने का सरकार का लक्ष्य है। लॉकडाउन की वजह से प्रदेश को अरबों का नुकसान हो चुका है। जयराम सरकार के समक्ष आर्थिकी को पटरी पर लाने की चुनौतीहै। लिहाजा मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने शराब की बिक्री पर सेस लगाने का फैसला लिया। प्रदेश में 9 करोड़ शराब की बोतलें हर साल पियक्कड़ गटक जाते हैं। शराब पर सरकार ने डेढ़ रुपए प्रति बोतल गौशाला निर्माण सेस लगाया है। इसके अलावा पंचायतों व नगर निकायों के दायरे में बिकने वाली शराब पर भी अढ़ाई रुपए सेस है। अब सरकार ने प्रति बोतल शराब पर कोविड सेस लगाने का फैसला लिया है।