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टिप्पणीः षड़यंत्र विचार के पीछे बदनीयत है

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेश टेद्रोस अधनोम घेब्रेयसन ने कहा था कि नोवेल कोरोना वायरस महामारी पैदा होने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन न सिर्फ वायरस के साथ संघर्ष करता है, बल्कि झूठी खबरें फैलाने और महामारी के मुकाबले को बर्बाद करने वाले लोगों के साथ भी संघर्ष करता है।

21 फरवरी को रूस स्थित चीनी दूतावास ने ऐसे अफवाह का खंडन किया कि रूस ने पुष्टि की है कि नोवेल कोरोना वायरस कृत्रिम है। रूसी सरकार ने इस अफवाह से भी इंकार कर दिया है। यह चीन को बदनाम करने का एक ताजा मिसाल है। नोवेल कोरोना वायरस महामारी पैदा होने के बाद पश्चिम की चीन विरोधी शक्तियां महामारी के कारण के बारे में झूठी सूचनाएं फैलाने और चीन की रोकथाम की कोशिशों पर कीचड़ फेंकने की कुचेष्टा कर रही हैं। षड़यंत्र विचार कई लोगों की नजर खींच रहा है। इस दौरान कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञों और मीडिया का प्रदर्शन सब से ध्यानाकर्षक रहा है, जैसे वॉल स्ट्रीय अखबार ने खुले तौर पर नस्लभेद से भरा आलेख जारी किया।

अवश्य इन सभी अफवाहों और झूठी खबरों का कोई आधार नहीं है। वे सिर्फ काल्पनिक सनसनीखेज बातें हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के कर्मचारी उन को इंफोडेमिक बताते हैं। उल्लेखनीय बात है कि षड़यंत्र विचार बनाने और फैलाने वाले अधिकांश लोग चीन विरोधी वाले हैं। वास्तव में वे अपनी निजी राजनीतिक हित हासिल करना चाहते हैं।

इधर कुछ दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय विज्ञान जगत ने महामारी के मुकाबले में चीन की अथक कोशिशों का उच्च मूल्यांकन किया और चीन का जोरदार समर्थन व्यक्त किया। 27 मशहूर अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य वैज्ञानिकों ने 18 फरवरी को चिकित्सा पत्रिका द लानसेट पर ब्यान जारी कर इस षड़यंत्र विचार की कड़ी निंदा की कि नोवेल कोरोना वायरस का पैदा होना प्राकृतिक नहीं है। उन के विचार में ऐसे षड़यंत्र विचार का हौवा, झूठ, पक्षपात बनाने और महामारी की रोकथाम पर नुकसान पहुंचाने के अलावा कोई उपयोग नहीं है। इस बयान में चीनी चिकित्सकों के असाधारण काम की प्रशंसा की गई। महामारी पराजित करने के लिए अनजान, झूठ और पक्षपात के बजाये विज्ञान, विवेक और सहयोग की जरूरत है।
(साभार—चाइना रेडियो इंटरनेशनल, पेइचिंग)