Cold War

शीत युद्ध का जीवित जीवाश्म माइक पोम्पिओ

शीत युद्ध को समाप्त हुए करीब दो दशक हो चुके हैं लेकिन वाशिंग्टन में फिर भी कुछ राजनीतिक नेता शीत युद्ध के काल में जी रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ उनमें से एक है।

माइक पोम्पिओ ने 19 जून को कोपेनहेगन के "लोकतंत्र शिखर सम्मेलन" तथा मार्शल फाउंडेशन के ब्रुसेल्स फोरम जो भाषण दिया है, उसमें से शीत युद्ध का गहरा विचार महसूस किया जा सकता है। माइक पोम्पिओ के अपने भाषणों में से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और चीन की राजनीतिक व्यवस्था के विरूद्ध शत्रुता का भाव झलकता है। पोम्पिओ ने अपने भाषणों में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ कड़ी आलोचना की और चीन को एक अधिनायकत्व देश पुकारा और नये कोरोनावायरस महामारी के फैलाव की चर्चा में पोम्पिओ ने एक बार फिर चीन पर दोष मड़ा। 

लेकिन वास्तव में अमेरिकी सरकार ने महामारी की रोकथाम में अपनी असक्षमता जाहिर किया है। महामारी फैलने के बाद चीन ने तुरंत ही वुहान को लॉकडाउन किया और संक्रमण को फैलने से रोका। चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को महामारी की जानकारी दी और दूसरे देशों के साथ संबंधित जानकारियां साझा कीं। उधर, अमेरिका ने महामारी की रोकथाम में नकारात्मक प्रतिक्रियाएं दीं। यहां तक कि अमेरिकी मीडिया ने भी नए कोरोनावायरस से संक्रमित उन अप्रवासियों को गरीब देशों में वापस निर्वासित करने के लिए अमेरिकी सरकार की कड़ी निन्दा की। 

माइक पोम्पिओ ने अपने भाषणों में कहा कि पश्चिमी देशों को यह विश्वास था कि उनके संपर्क से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाले चीन को बदला जा सकता है। लेकिन वे निराश हुए कि चीनी जनता अपनी राष्ट्रीय स्थिति के अनुकूल रास्ते पर आगे बढ़ेगी। और यह भी कहा जाता है कि अमेरिका द्वारा दूसरे देशों का शांतिपूर्ण परिवर्तन करने का यह व्यवहार अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों का उल्लंघन है। हरेक देश को अपनी राष्ट्रीय स्थिति के अनुकूल रास्ता चुनने का अधिकार है। 

और पोम्पिओ के भाषणों से हम यह भी देख सकते हैं कि अमेरिका चीन को अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है। पिछली सदी में अमेरिका ने सोवियत संघ के विरूद्ध ऐसा कदम उठाया था। लेकिन चीन सोवियत संघ नहीं है। अमेरिका की यह साजिश सफल नहीं रहेगी। आज की दुनिया में शांतिपूर्ण विकास युग का विषय है और उभय-जीत एवं सहयोग मुख्यधारा है। जो शीत युद्ध की विचारधारा में अड़ा रहा है, उसे अंततः इतिहास द्वारा छोड़ दिया जाएगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)