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बेअदबी के मामलों की जांच के लिए पंजाब सरकार की मंजूरी वापस लेने के खिलाफ सीबीआई की याचिका खारिज


नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने गुरूवार को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका खारिज कर दी जिसमें उसने पिछले साल सभी बेअदबी के मामलों को एजेंसी से वापस लेने के पंजाब सरकार के फैसले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया था।न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने देरी के आधार पर सीबीआई की याचिका खारिज कर दी लेकिन कानून का प्रश्न खुला छोड़ा।पीठ ने कहा, ‘‘देरी के आधार पर विशेष अनुमति याचिकाएं खारिज की जाती हैं। हालांकि कानून का प्रश्न खुला है। लंबित आवेदन का निस्तारण किया जाता है।अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल अमन लेखी ने सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से कहा कि अपील दाखिल करने में देरी हुई क्योंकि जांच एजेंसी को कानूनी मुद्दे से निपटना था नहीं तो यह मिसाल बन सकती है। मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदंबरम और सिद्धार्थ लूथरा ने पंजाब सरकार की तरफ से पक्ष रखा।पीठ को बताया गया कि सीबीआई द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करने में करीब एक साल की देरी हुई।

उच्च न्यायालय ने पिछले साल 25 जनवरी को कहा था, ‘‘घटनाओं की कड़ी दर्शाती है कि ये आपस में जुड़ी हैं, इसलिए यह अदालत सीबीआई से जांच वापस लेने या उसके बाद की अधिसूचनाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले में हस्तक्षेप करना जरूरी नहीं समझती। पंजाब में पिछली अकाली दल-भाजपा सरकार ने अक्टूबर 2015 में जांच सीबीआई को सौंपी थी। 2017 में अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी और उसने छह सितंबर, 2018 को अधिसूचना जारी करके सीबीआई को मामलों में जांच के लिए दी गयी सहमति वापस ले ली। अमरिंदर सिंह सरकार ने बेहबल कलां और बरगरी बेअदबी मामलों तथा उनके बाद पुलिस गोलीबारी के मामलों की जांच के लिए पंजाब पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया। मामले 2015 में बरगरी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला में बेअदबी की घटनाओं तथा बेहबल कलां और कोटकापुरा में पुलिस गोलीबारी की घटनाओं से जुड़े हैं।