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भारत स्थित चीनी राजदूत के इंटरव्यू का विश्लेषण

इस समय भारत में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के ताज़े आंकड़ों पर नजर डालें, तो 5 मई की सुबह 8 बजे तक भारत में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 46433 हो गई है। इनमें 32138 सक्रिय मामले हैं, जबकि 12726 लोगों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। देश में अब तक 1568 लोगों की कोरोना वायरस से मौत हो चुकी है।
आखिर भारत में कोविड-19 महामारी इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है? भारत में महामारी की रोकथाम और नियंत्रण की प्रक्रिया में क्या कठिनाइयां आ रही हैं? भारत में चीनी छात्रों की इस समय क्या स्थिति है? इस पर विस्तृत रुप से चर्चा करने के लिए सोमवार शाम भारत स्थित चीनी राजदूत सुन वेइतोंग चीन के राष्ट्रीय टीवी चैनल के एक प्रमुख कार्यक्रम न्यूज़ 1+1 में उपस्थित हुए। 
चीनी राजदूत सुन वेइतोंग ने भारत में हर दिन परीक्षण क्षमता में सुधार के साथ पुष्ट मामलों की संख्या में वृद्धि होने पर अपने विचार रखते हुए कहा कि हाल ही में, भारत में पुष्ट मामलों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, जो भारत में बढ़ती डिटेक्शन दर से संबंधित है। शुरुआत में दैनिक परीक्षणों की संख्या 2000 से अधिक से बढ़कर वर्तमान में 7000 से अधिक हो गई है। जैसे-जैसे परीक्षणों की संख्या में वृद्धि हो रही है, उससे भारत में बढ़ते पुष्ट मामले भी सामने आ रहे हैं।
राजदूत सुन वेइतोंग ने टीवी इंटरव्यू के दौरान इस बात का भी उल्लेख किया कि इस समय भारत में मृत्यु दर लगभग 3.2 प्रतिशत है, और पॉजिटिव दर 4% से 5% के बीच बनी हुई है। अभी भारत में महामारी का समग्र विकास वक्र अपेक्षाकृत सपाट है, और बड़े पैमाने पर प्रकोप देखने को नहीं मिल रहा है।
आगे राजदूत सुन वेइतोंग ने भारत में महामारी की रोकथाम में आ रही कठिनाइयों पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि भारत 135 करोड़ आबादी वाला एक महादेश और सबसे बड़ा समाज है, जो शायद ही दुनिया में देखने को मिले। भारत ने महामारी से लड़ने के लिए बहुत कठोर नियंत्रण उपाय किए हैं और कुछ निश्चित परिणाम भी हासिल हुए हैं। 
राजदूत का मानना है कि इतने बड़े सामाजिक समूह के प्रबंधन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कुछ सरल आंकड़े बताते हुए अपनी बात रखी कि सबसे पहले, भारत में जनसंख्या का आधार बड़ा है और घनत्व भी बड़ा है। भारत की आबादी 135 करोड़ है, जिसमें दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहर शामिल हैं, जिनकी आबादी 1 करोड़ से अधिक है। भारत की भूमि का क्षेत्रफल चीन से लगभग एक-तिहाई है, और इसकी जनसंख्या चीन के समान है। इसलिए, इतने बड़े जनसंख्या घनत्व के तहत, ऐसे देश का प्रबंधन करना काफी मुश्किल हो जाता है।
उनकी बात का दूसरा बिंदु यह था कि कि हालांकि भारत में डिटेक्शन दर तुलनात्मक रूप से बढ़ी है, लेकिन मौजूदा डिटेक्शन दर बहुत अधिक नहीं है। वर्तमान में, 10 लाख लोगों में से 820 लोगों का ही परीक्षण किया जा सकता है, जो कि दक्षिण कोरिया की तुलना में बहुत अधिक नहीं है, जहां 10 लाख लोगों में 11600 लोगों का परीक्षण किया जा सकता है।
उनका तीसरा तर्क था कि भारत में चिकित्सा संसाधन अभी भी सीमित हैं। भारत में हर 10 हजार लोगों के लिए 3.4 डॉक्टर, 3.2 नर्स, 70 बिस्तर और तीन से अधिक आपातकालीन बेड हैं। इस अनुपात को दुनिया में बहुत अधिक नहीं समझा जा सकता है। इसमें अभी भी बहुत गुंजाइश है।
इसके अलावा, उन्होंने लक्षणहीन संक्रमण मामलों की भी बात कही, जो इस समय भारत में आ रहे हैं। चीनी राजदूत सुन वेइतोंग ने इन बिंदुओं के साथ अपनी बात स्पष्ट की कि इन वजहों से भारत में महामारी रोकथाम और नियंत्रण में कठिनाइयां सामने आ रही हैं। 
पश्चिमी भारत के महाराष्ट्र राज्य में मुंबई के धारावी इलाके में कोरोना के बहुत ज्यादा मामले आये हैं। अब तक 600 मामले आ चुके हैं, और वहां हजारों की तादाद में लोग रहते हैं। इस पर राजदूत सुन वेइतोंग ने कहा कि झुग्गी-बस्ती में कोरोना संक्रमित मामले आने के बाद, भारत सरकार ने कई उपाय किए हैं, जिसमें स्टोर बंद करना, बड़े पैमाने पर परीक्षण करना, लोगों के लिए आवश्यक दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करना आदि शामिल हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि महामारी के प्रसार को रोका जा रहा है, और काफी हद स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है।
चीनी राजदूत सुन वेइतोंग ने विशेष कार्यक्रम न्यूज़ 1+1 में भारत में पढ़ रहे चीनी छात्रों की स्थिति पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि भारत में चीनी दूतावास चीनी छात्रों का अच्छे से ध्यान रख रहा है। इस समय, भारत में 240 से अधिक चीनी छात्र हैं, और भारत में महामारी फैलने के बाद, चीनी दूतावास और सभी चीनी कौंसलावास ने उन्हें हर संभव मदद देने का प्रयास किया है।
राजदूत सुन वेइतोंग ने कहा कि सभी चीनी छात्रों को स्वास्थ्य किट वितरित किया गया। कोई भी चीनी छात्र जहां भी रहता हो, उन तक स्वास्थ्य किट पहुंचवाई है। कुछ छात्र तो दूरदराज क्षेत्रों में रहते हैं, उन्हें यह स्वास्थ्य किट भिजवाने के लिए कई घंटे और कई सौ किलोमीटर गाड़ी चलाकर भी जाना पड़ा है। राजदूत का कहना है कि यदि भारत में महामारी लंबे समय तक रहेगी, तो चीनी दूतावास और कौंसलावास सभी चीनी छात्रों को स्वास्थ्य किट की दूसरी खेप भेजेंगे।
राजदूत ने यह भी कहा कि सभी चीनी छात्रों के संपर्क समूह की स्थापना की गई हैं। अब चार वीचैट ग्रुप बनाये गए हैं, जिसमें भारत में सभी चीनी छात्रों और उनके माता-पिता को समूह में रखा गया है। उनकी स्थिति के बारे में जानने और उनकी कठिनाइयों को हल करने के लिए ऐसे संपर्क समूह के माध्यम से उन्हें सही समय पर सहायता देने का प्रयास करते हैं।
इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि हमने भारत में उन विश्वविद्यालयों का भी पता लगाया जहां चीनी छात्र पढ़ते हैं। वे भारत के 10 राज्यों में 27 विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं। हमने इन विश्वविद्यालयों में से प्रत्येक के साथ संपर्क स्थापित किया है और उनके स्कूल प्राधिकारियों के साथ संपर्क में हैं। यदि वे स्कूल बंद करने के लिए उपाय करते हैं, तो हमें उम्मीद है कि वे हमारे छात्रों के लिए आवश्यक आवास और भोजन का प्रबंध करेंगे।
अंत में, चीन राजदूत सुन वेइतोंग ने इंटरव्यू में कहा कि वायरस हमारा समान दुश्मन है। इस तरह की चुनौती का सामना, केवल मिलकर ही कर सकते हैं। यदि हम सब एक साथ मिलकर काम करते हैं तो हम कठिनाइयों को दूर कर सकते हैं, और ये हम सभी का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।
(चीनी राजदूत सुन वेइतोंग के इंटरव्यू का विश्लेषण चाइना मीडिया ग्रुप के पत्रकार अखिल पाराशर ने किया है)