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दूसरों पर आरोप लगाना और जिम्मेदारी थोपना टीके के अनुसंधान के लिए लाभदायक नहीं

कोविड-19 एक नया वायरस है, जिसका फैलाव पूरी दुनिया में हो रहा है। हम अभी तक इस कोरोनावायरस से अंजान हैं, इसलिए टीका ही एकमात्र सशक्त वैज्ञानिक हथियार है, जो महामारी खत्म कर सकता है और अर्थव्यवस्था को बहाल कर सकता है। इस समय कोरोनावायरस के टीके का अनुसंधान और विकास पूरी मानव जाति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हालांकि, मौजूदा समय में बहुत से देश टीके बनाने के रेस में लगे हैं। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों पर नज़र डालें तो दुनिया में बनाए जा रहे टीकों की संख्या 120 से अधिक है। चीन में 4 निष्क्रिय टीका और 1 एडिनोवायरस टीका (विषाणुओं के बड़े समूह में से एक जिसके द्वारा ऊपरी श्वसन-पक्ष में संक्रमण होता है) का क्लीनिकल परीक्षण चल रहा है। चीन में टीका बनाने पर जो अनुसंधान और विकास किया जा रहा है, वो वैश्विक स्तर से मेल खाता है।

अभी पिछले महीने प्रमुख चिकित्सा पत्रिका ‘द लांसेट’, जो दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे प्रसिद्ध चिकित्सा पत्रिकाओं में से एक है, में एक पेपर छपा था, जिसमें चीनी विशेषज्ञों द्वारा विकसित किए जा रहे टीकों के क्लीनिकल परीक्षण के अच्छा परिणाम की बात की गई थी। यह कोरोनावायरस टीके के क्लीनिकल परीक्षण के परिणाम से जुड़े दुनिया का पहला थीसिस है, जिसकी अमेरिका और ब्रिटेन के विशेषज्ञों ने प्रशंसा की।

इसके अलावा, चीन ने संबंधित देशों के साथ टीके और दवा के अनुसंधान व विकास में सहयोग किया और डब्ल्यूएचओ समेत अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ वैज्ञानिक सहयोग भी किया। इस बात की पुष्टि चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लीच्येन ने 13 मई को न्यूज ब्रीफिंग में कर चुके हैं कि चीन कनाडा समेत दुनिया के विभिन्न देशों के साथ दवा और टीके के अनुसंधान में सहयोग कर रहा है। चीन की चिकित्सा संस्थाओं, रोग रोकथाम संगठनों और वैज्ञानिकों ने द लांसेट, साइनस, नैचर, न्यू इंग्लैंड जरनल ऑफ़ मेडिसिन आदि विश्व प्रसिद्ध विद्याध्ययन पत्रिका में दसेक पेपर जारी किए और समय पर अनुसंधान की उपलब्धियों को साझा भी किया।

यह हमें मानना होगा कि कोरोनावायरस एक नया अज्ञात वायरस है। इसकी अच्छे से पहचान कर रोकथाम की जानी चाहिए। चीन की बात करें तो चीन न केवल वायरस से प्रभावित देश रहा है, बल्कि महामारी की रोकथाम में वैश्विक योगदान देने वाला देश भी है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 73वीं विश्व स्वास्थ्य महासभा में वचन दिया है कि अनुसंधान और प्रयोग करने के बाद चीन का टीका पूरी दुनिया को मुहैया करवाया जाएगा। चीन टीके के विकासशील देशों में प्रयोग में अपना योगदान करेगा।
इस कुंजीभूत समय में अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर स्कॉट ने 7 जून को चीन पर पश्चिमी देशों में टीके के अनुसंधान को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया, लेकिन उन्होंने इसका कोई सबूत नहीं दिया, सिर्फ यही कहा कि सबूत खुफिया जगत से मिला है। इस पर चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ह्वा छुनयिंग ने कहा कि कोरोनावायरस के टीके का अनुसंधान चीन और अमेरिका के बीच लड़ाई नहीं है, जबकि मानव जाति और वायरस के बीच लड़ाई है। कोई भी देश टीके के अनुसंधान में सफल होता है, तो वह अवश्य ही मानव जाति के लिए सबसे बड़ा योगदान होगा।

अब दुनिया के बहुत से वैज्ञानिक टीके के अनुसंधान और नैदानिक परीक्षण करने में व्यस्त हैं। टीके का अनुसंधान दुनिया के वैज्ञानिकों और चिकित्सकों के सहयोग की जरूरत है। अन्य देशों पर आरोप लगाना और जिम्मेदारी थोपना महामारी की रोकथाम के लिए कोई लाभ नहीं है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)