8 April 2020 Hukamnama, Hukamnama, हुक्मनामा श्री हरिमंदिर

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 8 अप्रैल

धनासरी महला १ घर १ चउपदे
ੴ सतिनामु करता पुरखु निरभउ निरवैर अकाल मूरति अजूनी सैभं(ग) गुर प्रसादि ॥
जीउ डरत है आपणा कै सियो करी पुकार ॥ दूख विसारणु सेविआ सदा सदा दातारु ॥१॥ साहिबु मेरा नीत नवा सदा सदा दातारु ॥१॥ रहाउ ॥ अनदिनु साहिबु सेवीऐ अंति छडाए सोए ॥ सुणि सुणि मेरी कामणी पारि उतारा होए ॥२॥

(जगत दुखों का समुंदर है, इन दुखों को देख कर) मेरी जिंद कांप जाती है (परमात्मा के बिना और कोई बचाने वाला नहीं दीखता) जिस के पास जा कर मैं अरजोई-अरदास करूँ । (इस लिये और आसरे छोड कर) मैं दुखों को नाश करने वाले प्रभु को ही सिमरता हूँ , वह सदा ही मेहर करने वाला है । (फिर वह) मेरा मालिक सदा ही बख्शिश तो करता रहता है (परन्तु वह मेरी रोज की बिनती सुन के बख्शिश करने में कभी परेशान नहीं होता) रोज ऐसे है जैसे पहली बार अपनी मेहर करना लगा है।१।रहाउ। हे मेरी जिन्दे! हर रोज उस मालिक को याद करना चाहिये (दुखों से) आखिर वो ही बचाता है। हे मेरी जिन्दे ! ध्यान से सुन (उस मालिक का सहारा लेने से ही दुखों के समुंदर से ) पार निकला जा सकता है॥२॥