Hukamnama, हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 30 अप्रैल

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ रागु देवगंधारी महला ९ ॥
यह मनु नैक न कहिओ करै ॥ सीख सिखाइ रहिओ अपनी सी दुरमति ते न टरै ॥१॥ रहाउ ॥ मदि माइआ कै भइओ बावरो हरि जसु नहि उचरै ॥ करि परपंचु जगत कउ डहकै अपनो उदरु भरै ॥१॥

अकाल पुरख एक है वेह सतगुरु की कृपा द्वारा मिलता है। राग देवगन्धारी में गुरुतेगबहादर जी की बानी
हे भाई! यह मन जरा भी मेरा कहा नहीं मानता। मैं इस को शिक्षा दे दे के थक गया हूँ, फिर भी यह खोटी बुद्धि से हटता नहीं।१। रहाउ। हे भाई! माया के नशे में यह इतना पागल हो गया है, कभी यह परमात्मा की सिफत-सलाह की बना नहीं उच्चारता, दिखावा कर के दुनिया को ठगता है, और, (ठ्ग्गी से एकत्र किये धन के द्वारा) अपना पेट भरता है।१।