2 july 2020 hukamnama

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 2 जुलाई

सलोकु मः ३ ॥ परथाइ साखी महा पुरख बोलदे साझी सगल जहानै ॥ गुरमुखि होइ सु भउ करे आपणा आपु पछाणै ॥ गुर परसादी जीवतु मरै ता मन ही ते मनु मानै ॥ जिन कउ मन की परतीति नाही नानक से किआ कथहि गिआनै ॥१॥

महा पुरुख किसी के सम्बन्ध में शिक्षा का बचन बोलते है (पर वेह शिक्षा) सार संसार के लिए बराबर होती हा, जो मनुख सतगुरु के सन्मुख होता है, वह (सुन के) प्रभु का डर (हिरदय में धारण) करता है, और अपने आप की खोह करता है। सतगुरु की कृपा से वह संसार में रहता हुआ माया से दूर रहता है, तो उसका मन अपने आप में रहता है (बहार भटकने से हट जाता है)। हे नानक! जिनका मन पसीजा नहीं, उनको ज्ञान की बातें करने का कोई लाभ नहीं होता।१।