19 april 2020 hukamnama

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 19 अप्रैल

सलोकु मः ३ ॥ वाहु वाहु से जन सदा करहि जिन्ह कउ आपे देइ बुझाइ ॥ वाहु वाहु करतिआ मनु निरमलु होवै हउमै विचहु जाइ ॥ वाहु वाहु गुरसिखु जो नित करे सो मन चिंदिआ फलु पाइ ॥ वाहु वाहु करहि से जन सोहणे हरि तिन्ह कै संगि मिलाइ ॥ वाहु वाहु हिरदै उचरा मुखहु भी वाहु वाहु करेउ ॥ नानक वाहु वाहु जो करहि हउ तनु मनु तिन्ह कउ देउ ॥१॥

जिन मनुष्यों को प्रभु स्वयं ही सुमति देता है वह सदा ही प्रभु की सिफत सलाह करते हैं, प्रभु की सिफत-सलाह करने से मन पवित्र होता है और मन में से अहंकार दूर होता है। जो भी मनुख गुरु के सन्मुख हो के प्रभु की सिफत सलाह करता है, उस को मन-चाहा फल प्राप्त होता है। जो सिफत-सलाह करते हैं, वह सुंदर दास प्रभु से मिलाप कर लेते हैं। जो ह्रदय में सिफत=सलाह करते हैं, उनके मुख से भी सिफत सलाह ही निकलती है। हे नानक! जो मनुख प्रभु की सिफत सलाह करते हैं, मैं अपना तन मन उनके आगे भेंट कर दूँ॥१॥