12 april 2020 hukamnama

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 12 अप्रैल

सोरठि महला ४ ॥ आपे स्रिसटि उपाइदा पिआरा करि सूरजु चंदु चानाणु ॥ आपि निताणिआ ताणु है पिआरा आपि निमाणिआ माणु ॥ आपि दइआ करि रखदा पिआरा आपे सुघड़ु सुजाणु ॥१॥ मेरे मन जपि राम नामु नीसाणु ॥ सतसंगति मिलि धिआइ तू हरि हरि बहुड़ि न आवण जाणु ॥ रहाउ ॥ आपे ही गुण वरतदा पिआरा आपे ही परवाणु ॥ आपे बखस कराइदा पिआरा आपे सचु नीसाणु ॥ आपे हुकमि वरतदा पिआरा आपे ही फुरमाणु ॥२॥

हे भाई! वह प्यारा प्रभु आप ही सृष्टि की रचना करता है, और (संसार को) रोशन करने के लिए सूरज व् चंदर बनाता है। प्रभु आप ही बेसहारों का सहारा है, जिस को कोई आदर मान नहीं देता उनको वह आदर मान देने वाला है। वह प्यारा प्रभु सुंदर आत्मिक बनावट वाला है, सब के दिलों की जानने वाला है, वह कृपा कर के सब की रक्षा करता है॥१॥ हे मेरे मन! परमात्मा का नाम सुमिरन किया कर। (नाम ही जीवन-सफ़र के लिए) राहदारी है। हे भाई! साध संगत में मिल कर तूँ परमात्मा का ध्यान धरा कर, (ध्यान की बरकत से) फिर जन्म मरण का चक्र नहीं रहेगा॥रहाउ॥ हे भाई! वह प्यारा प्रभु आप ही (जीवों को अपनें ) गुणों की सौगात देता है, आप ही जीवों को अपनी हजूरी में कबूल करता है। प्रभु आप ही सब ऊपर कृपा करता है, वह आप ही (जीवों के लिए) सदा कायम रहने वाली प्रकाश की मीनार है। वह प्यारा प्रभु आप ही (जीवों को) हुकम में चलाता है , आप ही हर जगह हुकम करता है॥२॥