wolves cry

लाल चांद को देखकर क्यों चिल्लाते हैं भेड़िए, वजह जान कांप जाएंगे आप

अक्सर आपने  कई फिल्मों  या रियल  लाइफ में भेड़िये को चाँद की तरफ देख कर रोते हुए देखा होगा। ऐसी चीजों को देखकर अक्सर हमारे मन  में अजीबो गरीब ख्याल आने शुरू हो जाते हैं। हम सोचने लगते हैं कि इस भेड़िये को शायद कुछ दिखाई दे रहा है। लेकिन  क्या आपने कभी  इसके पीछे  की वजह जानने  की कोशिश की है। हम अपने बुजुर्गो की अक्सर बातें सुनते हैं। उनका कहना होता है कि ये इसलिए रोते  हैं क्योकि इनको उस वक्त कुछ शैतानी शक्तियां दिखाई देती है।  लेकिन ऐसा कुछ नहीं। है।इसके पीछे भी एक बहुत बड़ा रहस्य है। आज हम आपको  इसी के बारे में बताएंगे। तो चलिए जानते हैं इसके बारे  में...

बता दें अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक, सुपर मून या फुल मून पर चंद्रमा अन्य दिनों के मुकाबले धरती के सबसे करीब यानी 3,63,000 किमी की दूरी पर होता है। जब चंद्रमा पृथ्वी से सर्वाधिक दूरी पर होता है तब वह 4,05,000 किमी की दूरी पर होता है। चंद्रमा पर लगने वाली इस पूरी प्रक्रिया को नासा ने मोस्ट डैजलिंग शो यानी सबसे चमकदार शो कहा है। 
 
नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के रिसर्च साइंटिस्ट डॉ नोआह पेट्रो के मुताबिक सुपर मून पर चंद्रमा आम दिनों के मुकाबले 14 फीसदी बड़ा और 30 फीसदी अधिक चमकदार  होता है। इस दौरान चांद का रंग लाल तांबे जैसा नजर आता है, इसलिए इसे ब्लड मून कहा जाता है। ग्रहण के दौरान चंद्रमा के रंग बदलने पर वैज्ञानिकों का मानना है कि इस दौरान सूरज की रोशनी धरती से होकर चंद्रमा पर पड़ती है। हमारे ग्रह की छाया पड़ने की वजह से चंद्रमा का रंग ग्रहण के दौरान बदल जाता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि तीन खगोलीय घटनाओं के संयोग से बन रहे इस पूर्ण चंद्र ग्रहण की रात को आसमान में अद्भुत नजारे दिखाई देंगे। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन जिन क्षत्रों में भी दिखाई देगा वहां इस अद्भुत नजारे को बिना किसी उपकरण के खुली आंखों से देखा जा सकेगा। इस ग्रहण को अमेरिकी जनजाती वुल्फ मून के नाम से जानती है। ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा की रात को भोजन की तलाश में निकलने वाले भेड़िये आसमान में लाल चांद को देखकर जोर-जोर से आवाज लगाते हैं यानी कि चिल्लाते हैं। इसलिए इस चंद्र ग्रहण को वुल्फ मून भी कहा जाता है। 

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