China India and China US relations

वांग यीः मतभेद चीन-भारत और चीन-अमेरिका संबंध का संपूर्ण विषय नहीं है

चीनी स्टेट काउंसिलर और विदेश मंत्री वांग यी ने 7 मार्च को पेइचिंग में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में चीन-भारत सीमा विवाद की चर्चा करते समय कहा कि सीमा विवाद ऐतिहासिक कारणों से पीछे छूट गया मामला है, जो चीन-भारत संबंधों का संपूर्ण विषय नहीं है। दोनों पक्षों को इसका उचित नियंत्रण करना चाहिए और सहयोग मजबूत करने के जरिए इस मामले के समाधान के लिए अनुकूल स्थिति तैयार करनी चाहिए।

वांग यी ने कहा कि चीन-भारत संबंध वास्तव में दुनिया के दो सबसे बड़े विकासशील देशों के बीच शांतिपूर्ण अस्तित्व और समान विकास का सवाल है। चीन और भारत के बीच व्यापक साझा हित और सहयोग की बड़ी निहित शक्ति मौजूद है। चीन और भारत दोस्त व साझेदार हैं, न कि खतरा व प्रतिद्वंद्वी। दोनों पक्षों को मुकाबला करने के बजाय सहयोग मजबूत करना चाहिए।

वांग यी ने कहा कि पिछले साल चीन और भारत के सीमा क्षेत्र में हुए संघर्ष का सही और गलत स्पष्ट है। तथ्यों से फिर से जाहिर है कि एक पक्ष द्वारा बनाया गया टकराव समस्या का निपटारा नहीं कर सकता, शांतिपूर्ण वार्ता ही सही रास्ता है। वार्ता के जरिए सीमा विवाद का समाधान करने का चीन का रुख स्पष्ट है, अपनी प्रभुसत्ता व हितों की रक्षा करने का संकल्प दृढ़ है। दोनों पक्षों को मौजूदा सहमति मजबूत कर वार्ता के जरिए नियंत्रण व्यवस्था सुधारनी चाहिए। ताकि एक साथ सीमा क्षेत्र की शांति व स्थिरता बनायी जा सके।

चीन-अमेरिका संबंध की चर्चा में वांग यी ने कहा कि दोनों देशों या विश्व के नागरिकों के समान हितों के मद्देनजर सहयोग चीन और अमेरिका का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए। चीन-अमेरिका संबंधों का विकास करने के लिए एक दूसरे देश की अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत का कड़ाई से पालन करने की जरूरत है। चीन एक-दूसरे की प्रभुसत्ता का सम्मान करने की पूर्व शर्त में विभिन्न पक्षों के साथ विश्वास को प्रगाढ़ करना चाहता है। लेकिन चीन निराधार आरोप या निंदा करने की कार्रवाइयों को कतई स्वीकार नहीं करेगा। चीन अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों का स्वस्थ व स्थिर विकास करना चाहता है। 

वांग यी ने कहा कि दो विभिन्न सामाजिक प्रणाली वाले देश होने के नाते चीन और अमेरिका के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है। अहम बात यह है कि दोनों को सदिच्छापूर्ण आवाजाही से मतभेदों पर कारगर रूप से नियंत्रण करते हुए विरोध और मुठभेड़ से बचना चाहिए। दोनों को उचित और समानता के आधार पर प्रतिस्पर्धा करते हुए विकास करना चाहिए, लेकिन दोनों को एक-दूसरे पर प्रहार नहीं करना चाहिए।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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