Virbhadra Singh, Himachal Pradesh

उपलब्धियों से भरा था वीरभद्र सिंह का राजनीतिक सफर, नेहरू को मानते थे गुरु

शिमलाः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हिमाचल प्रदेश के 6 बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह (87) का गुरुवार तड़के निधन हो गया। उन्होंने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (IGMCH) में आखिरी सांस ली। बता दें कि, वीरभद्र सिंह का राजनीतिक सफर उपलब्धियों से भरा था। वीरभद्र सिंह को 'राजा साब' के रूप में जाना जाता था। वह बुशहर की तत्कालीन रियासत में पैदा हुए थे। वीरभद्र 50 से अधिक वर्षों से सक्रिय राजनीति में थे। वीरभद्र सिंह पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को राजनीतिक गुरु मानते थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु उन्हें राजनीति में लाए थे, जिसका वह बार-बार जिक्र किया करते थे। 

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ऐसा था वीरभद्र सिंह का राजनीतिक सफर 
वीरभद्र सिंह ने वर्ष 1962 में पहली बार तत्कालीन महासु लोकसभा सीट से चुनाव जीता। इस तरह उन्हें तीसरी लोकसभा का सबसे युवा सांसद होने का गौरव हासिल हुआ। इसके बाद उन्होंने 1967, 1971, 1980 और 2009 में लोकसभा चुनाव जीते। इस दौरान वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सरकार में दिसंबर 1976 से मार्च 1977 तक पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री और सितंबर 1982 से अप्रैल 1983 तक उद्योग राज्य मंत्री रहे। वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार में 28 मई 2009 से 18 जनवरी 2011 तक इस्पात मंत्री और 19 जनवरी 2011 से 26  जून 2012 तक केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्री रहे।

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वीरभद्र सिंह 1983-1985, 1985-1990, 1993-1998, वर्ष 1998 में कुछ दिन, 2003-2007 और 2012 से 2017 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे। वर्तमान में वह सोलन जिले की अर्की विधानसभा सीट से विधायक थे। वह अपनी परम्परागत रोहड़ू विधानसभा चुनाव लड़ते थे। रामपुर की सीट के आरक्षित होने के कारण वह कभी भी यहां से चुनाव नहीं लड़ पाए। परिसीमन के चलते रोहड़ू सीट भी आरक्षित हुई तो वर्ष 2012 में उन्होंने शिमला ग्रामीण क्षेत्र से चुनाव लड़ा। वर्ष 2017 में उन्होंने यह सीट अपने बेटे विक्रमादित्य सिंह के लिए सीट छोड़ दी और खुद अर्की से चुनावी मैदान में उतरे। लोकसभा के लिए वह पहली बार 1962 में चुने गए।

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