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चीन के पर्यावरण शासन का सफल अनुभव सीखने लायक है- भारतीय जानकार

इन दिनों संयुक्त राष्ट्र “जैव विविधता संधि” के हस्ताक्षरकर्ताओं का 15वां सम्मेलन (सीओपी15) दक्षिण पश्चिमी चीन के युन्नान प्रांत के खुनमिंग शहर में आयोजित किया जा रहा है। भारतीय जानकार डॉक्टर विकास कुमार ने चाइना मीडिया ग्रुप को दिए एक इन्टरव्यू में कहा कि इधर के सालों में चीन में पारिस्थितिकी और पर्यावरण की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। संबंधित क्षेत्र में चीन के शासन का सफल अनुभव सीखने लायक है। 

वर्तमान में डॉक्टर विकास कुमार पेइचिंग विदेशी भाषा विश्वविद्यालय में भारतीय शिक्षक हैं। उन्होंने कहा कि इधर के सालों में, चीन ने पर्यावरण शासन में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्हें चीन में अध्ययन करते, जीवन बिताते और काम करते हुए 14 साल हो चुके हैं। बीते वर्षों में उन्होंने चीन के अधिकांश जगहों की यात्रा की और खुद इस देश के पर्यावरण परिवर्तन के प्रति बहुत प्रभावित हुए हैं। 

इन सालों में विकास कुमार चीन में पर्यावरण बदलाव के साक्षी भी बने। उन्होंने कहा कि आजकल चीन पारिस्थितिकी और पर्यावरण संरक्षण को बहुत महत्व देता है। उदाहरण के लिए, इन दिनों पेइचिंग का मौसम बहुत सुहावना है, धूप भी बहुत अच्छी निकली हुई है। पिछले कुछ सालों से पेइचिंग के मौसम में बहुत बदलाव आया है। अगर दो-तीन साल पहले की बात करें, पेइचिंग का मौसम इतना अच्छा नहीं था। लेकिन अब प्रदूषण बहुत हद तक नियंत्रित किया जा चुका है। नीला आसमान, स्वच्छ हवा और धूप देखने को मिलती है। यह सब चीन सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उठाए गए कदमों का परिणाम है।

चीन सरकार और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग पारिस्थितिक विकास और पर्यावरण संरक्षण पर बहुत जोर देते हैं। शी चिनफिंग ने कहा कि“स्वच्छ जल और हरित पर्वत सोना और चांदी जैसी मूल्यवान संपत्ति हैं”,“चीन अस्थायी आर्थिक विकास के बदले पर्यावरण संरक्षण को कभी नहीं छोड़ेगा”। विकास कुमार के विचार में राष्ट्रपति शी के विचारों को सभी स्तरों पर सरकारों और पूरे देश के लोगों से मजबूत समर्थन मिला है। ऊपर से नीचे तक, पूरे देश में एक-साथ प्रयास किया जाता है। यही कारण है कि चीन ने हाल के वर्षों में पर्यावरण शासन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इसकी चर्चा करते हुए विकास कुमार ने कहा कि चीन ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में तरह-तरह के कदम उठाए। मैं एक छोटा सा उदाहरण देता हूं, आजकल चीन में जो कचरा पैदा होता है, उसे तीन तरह के डिब्बों में डाला जाता है, पहले ऐसा नहीं था, लेकिन इधर के कुछ सालों में यह परिवर्तन देखने को मिल रहा है। तो कहा जा सकता है कि आम लोग भी पर्यावरण को बचाने के लिए जागरूक हैं और इस तरह से काम कर रहे हैं।

वर्तमान में वैश्विक जलवायु परिवर्तन से पृथ्वी को अधिक चरम मौसम और चरम जलवायु घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। चीन सरकार जलवायु परिवर्तन मुद्दे को बहुत महत्व देती है। 12 अक्टूबर को, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सीओपी15 शिखर सम्मेलन में वीडियो भाषण देते हुए कहा कि चीन वैश्विक सतत विकास में मदद करने के लिए हरित परिवर्तन से प्रेरित है। विकास कुमार ने कहा कि चीन ने साल 2030 तक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को अधिकतम करने और साल 2060 तक कार्बन तटस्थता प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए चीन द्वारा किए गए विभिन्न प्रयास सराहनीय हैं। 

विकास कुमार का मानना है कि चीन सरकार पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में आवश्यक कदम उठा रही है और पर्यावरण को और अच्छा बनाने की कोशिश कर रही है। वैश्विक जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में चीन सरकार जरूरी कदम उठा रही है, और अहम परिणाम प्राप्त करने के लिए विश्व के अन्य देशों के साथ सहयोग करने को तैयार है। “अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भाषण दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि चीन विकासशील देशों में हरित और निम्न-कार्बन ऊर्जा के विकास का जोरदार समर्थन करेगा और विदेशों में कोयला चालित नई बिजली परियोजनाओं का निर्माण नहीं करेगा। यह अपने आपमें बहुत बड़ा कदम है, और कह सकते हैं कि यह दूसरे देशों के विकास के लिए उपयोगी उदाहरण बनेगा। हम सभी के प्रयासों से विश्व में पर्यावरण की स्थिति बेहतर से बेहतर हो सकेगी।” विकास कुमार ने यह बात कही।

उन्होंने कहा कि अतीत में चीन में पर्यावरण प्रदूषण पर विभिन्न देशों का ध्यान केंद्रित होता था, लेकिन आज, विश्व की नज़र चीन में बेहतर पर्यावरण शासन और पारिस्थितिकी संरक्षण पर टिकी हुई है। चीन के पड़ोसी  देश के रूप में भारत में पर्यावरण प्रदूषण अब भी गंभीर है। उनका मानना है कि भारत पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में चीन के सफल अनुभव से सीख सकता है, दोनों देश आपसी सीख के आधार पर पारस्परिक सहयोग मजबूत कर सकते हैं। “मुझे लगता है कि इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग के बहुत ज्यादा अवसर हैं। भारत चीन के अनुभवों से यह सीख सकता है कि चीन ने नीति निर्धारण के माध्यम से किस तरह से प्रदूषण पर काबू पाने में सफलता प्राप्त की है। भारतीय लोगों को भी यह सीखना चाहिए कि चीनी नागरिक पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक है, और हम किस तरह से सहयोग और आदान-प्रदान कर सकते हैं। इस दिशा में दोनों देशों के बीच संवाद होना चाहिए। दोनों देशों के पर्यावरण विशेषज्ञ हैं, उनको आपस में बैठना चाहिए, बैठकर विचार विमर्श कर सकते हैं कि चीन में कैसे पर्यावरण प्रदूषण पर काबू पाया गया है। इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बहुत बड़ी संभावनाएं हैं और बहुत से अवसर हैं, जिन पर दोनों देश सहयोग कर सकते हैं।” विकास कुमार ने यह कहा।
(थांग युआनकेवइ, चाइना मीडिया ग्रुप, खुनमिंग)

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