Supreme Court, CBI probe

Supreme Court ने CBI जांच के खिलाफ बंगाल की अर्जी पर रजिस्ट्री से केंद्र को नोटिस जारी करने को कहा

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि उसकी रजिस्ट्री पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दाखिल याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी करेगी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सीबीआई कानून के तहत राज्य से पूर्व-आवशय़क मंजूरी हासिल किए बिना जांच आगे बढ़ा रही है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत अपने मूल दीवानी मुकदमे में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 के प्रावधानों का उल्लेख किया है और कहा है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कानून के तहत अनिवार्य राज्य सरकार की अनुमति के बिना जांच कर रहा है और प्राथमिकी दर्ज कर रहा है। हाल में सीबीआई ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामलों में कई प्राथमिकी दर्ज की हैं।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के नियमों के अनुसार मुकदमा दायर करते समय रजिस्ट्री द्वारा तुरंत नोटिस जारी किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा, ‘‘इसे अदालत के सामने क्यों सूचीबद्ध किया गया है। उच्चतम न्यायालय के नियमों के अनुसार मुकदमा दायर करते समय रजिस्ट्री द्वारा तुरंत नोटिस जारी किया जाना चाहिए। यह अदालत के सामने क्यों आ रहा है? विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के विपरीत, अनुच्छेद 131 के तहत दायर किए गए मुकदमे में स्वत: नोटिस देना पड़ता है। अंतरिम राहत अर्जी नोटिस जारी होने के बाद ही सुनी जा सकती है। हम रजिस्ट्री को नोटिस जारी करने को कहेंगे।’’   

राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप सीबीआई द्वारा चुनाव बाद हिंसा के मामलों में दर्ज प्राथमिकी में जांच पर रोक लगाने का अनुरोध किया है। याचिका में कहा गया है कि चूंकि तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा केंद्रीय एजेंसी को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली गई है, इसलिए दर्ज की गई प्राथमिकी पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

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