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Badminton में सिल्वर जीतने वाले DM सुहास बोले- जिंदगी में कभी भी एक ही समय में इतना खुश और इतना निराश नहीं हुआ

टोक्यो: भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी और नौकरशाह सुहास यथिराज ने पैरालंपिक खेलों में सिल्वर मेडल जीतने के बाद कहा कि पहली बार उनकी जिंदगी में इस तरह की मिश्रित भावनायें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि जिंदगी में पहली बार एक ही समय उन्हें इतनी खुशी हो रही है और साथ ही निराशा भी। नोएडा के 38 वर्षीय जिलाधिकारी सुहास रविवार को टोक्यो पैरालंपिक की पुरूष एकल एसएल4 क्लास बैडमिंटन स्पर्धा के फाइनल में शीर्ष वरीय फ्रांस के लुकास माजूर से 21-15 17-21 15-21 से हार गये जिससे उन्होंने सिल्वर मेडल से अपना अभियान समाप्त किया।

भारतीय पैरालंपिक समिति द्वारा पोस्ट किये गये वीडियो संदेश में उन्होंने मैच जीतने के बाद कहा, ‘‘बहुत ही भावुक क्षण है। मैंने कभी भी एक साथ इतनी खुशी और इतनी निराशा कभी महसूस नहीं की। खुश इसलिये हूं कि सिल्वर मेडल जीता लेकिन निराश इसलिये हूं क्योंकि मैं गोल्ड मेडल से करीब से चूक गया।’’ सुहास को एक टखने में विकार है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन भाग्य वही देता है जिसका मैं हकदार हूं और शायद मैं सिल्वर मेडल का हकदार था इसलिये मैं कम से कम इसके लिये खुश हूं।’’ उन्होंने कहा कि वह उम्मीद कर रहे थे कि योयोगी नेशनल स्टेडियम में राष्ट्रगान बजेगा लेकिन उनके हाथों से गोल्ड मेडल फिसल गया और ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी खिलाड़ी के लिये ओलंपिक या पैरालंपिक में मेडल से ज्यादा कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है, इसलिये यह मेरे लिये दुनिया का सबसे बड़ा मेडल है।’’

कर्नाटक के हसन में जन्में सुहास ने अपने पिता के साथ काफी यात्रा की है क्योंकि वह सरकारी अधिकारी थे जिससे उनका अलग अलग जगह ट्रांसफर होता रहता था। सुहास ने कहा, ‘‘मैं अपने दिवंगत पिता की वजह से ही यहां पर हूं और यह मेडल जीता है। और भी कई लोगों की शुभकामनाओं की वजह से मैं यहां पर हूं जिसके लिये मैं उनका धन्यवाद करता हूं क्योंकि उनकी वजह से ही मैं इस बड़े मंच पर अच्छा कर सका। मैं बहुत खुश हूं, यह गर्व का क्षण है।’’