South China Sea

दक्षिण चीन सागर अमेरिका का प्रभुत्व सुरक्षित करने का अखाड़ा नहीं

7 अप्रैल को अमेरिकी नौसेना के विमान वाहक लड़ाकू पोत यूएसएस थियोडोर रूज़वेल्ट ने दक्षिण चीन सागर में संयुक्त सैन्याभ्यास समाप्त किया  ।इस साल विमान वाहक पोत रूज़वेल्ट तीसरी बार इस जल क्षेत्र में घुसा ,जिसने फिर साबित किया है कि अमेरिका दक्षिण चीन सागर की शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा है ।

अमेरिका की रणनीति में दक्षिण चीन सागर इसके हिंद-प्रशांत क्षेत्र के नेतृत्वकारी स्थान की सुरक्षा करने वाला नाजुक समुद्री क्षेत्र है ।इसी कारण अमेरिकी युद्ध पोत कभी-कभी तथाकथित जहाजरानी की मुक्ति के बहाने दक्षिण चीन सागर में घुसते हैं ,जो इस क्षेत्र के देशें की प्रभुसत्ता और सुरक्षा पर नुकसान पहुंचाते हैं ।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में अमेरिकी सैन्य जहाजों ने दस से अधिक बार दक्षिण चीन सागर पार किया और बाइडेन के सत्ता में आने के बाद विमान वाहक लड़ाकू पोत तीन बार दक्षिण चीन सागर आ चुके हैं।अमेरिका का उद्देश्य चीन पर दबाव डालना और हिंद प्रशांत रणनीति को जोरदार तरीके से बढ़ाना है ।

भले ही अमेरिका कितनी ताकत भी क्यों न दिखाए ,इस क्षेत्र में अशांति फैलान के षड़्यंत्र निश्चिय ही विफल होगा ।एक तरफ अमेरिका के मित्र देश सिर्फ बड़ी बात कर अमेरिका का समर्थन करते हैं और उनकी कार्रवाई संयमित रहती है ।क्योंकि वे चीन को भड़काने का गंभीर परिणाम जानते हैं ।दूसरी तरफ अमेरिका की कार्रवाई इस क्षेत्र के देशों की शांति बनाए रखकर विकास का समान अनुसरण करने की आकांक्षा के विरुद्ध है ।

चालू साल चीन-आसियान वार्तालाप तंत्र की स्थापना की 30वीं वर्षगांठ है ।दोनों पक्षों के सहयोग में मजबूत जीवंत शक्ति नजर आ रही है ।वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के बावजूद चीन और आसियान पहली बार एक दूसरे का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बने। उल्लेखनीय बात है कि आरसीईपी समझौता सफलता से संपन्न हुआ ,जिसने चीन-आसियान साझे समुदाय के निर्माण में शक्तिशाली ऊर्जा डाली है ।

चीन और आसियान के सदस्यों की समान कोशिशों से अब दक्षिण चीन सागर की स्थिति स्थिर है ।दोनों पक्ष समुद्र संबंधी मामले में सहयोग बढ़ा रहे हैं ।दोनों पक्षों में मतभेद के नियंत्रण व निपटारे के लिए विश्वास ,क्षमता और बुद्धिमता है ।

इस क्षेत्र में अमेरिका के टांग अड़ाने से इस क्षेत्र के देशों की शांति व विकास बढ़ाने की प्रतिबद्धता को हिलाया नहीं जा सकता है ।इतिहास साबित करेगा कि कौन गुजरने वाला होगा और कौन मालिक होगा ।
(साभार----चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

 

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