Giani Harpreet Singh raised questions on Manjinder Sirsa

Manjinder Sirsa के भाजपा में शामिल होने पर श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी Harpreet Singh ने उठाए सवाल

नई दिल्ली : सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के पूर्व अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने पर सवाल उठाए हैं। 

हरप्रीत ने गुरुवार को जारी एक बयान में भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि सिरसा को जेल का डर दिखा कर भाजपा में शामिल करवाया गया है। इसके लिए दिल्ली की सिख जत्थेबंदियों के वे लोग भी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने सिरसा को भाजपा में शामिल करवाए जाने के लिए ऐसा माहौल बनाया। जत्थेदार ने कहा, ‘‘जब अंग्रेज भारत आए तो उन्होंने यहां कब्जा करने के बाद लोगों को धर्म या कर्म चुनने को कहा। जिन्हें धर्म प्यारा था, उन्होंने धर्म चुना और जिन्हें कर्म प्यारा था, उन्होंने कर्म चुना। वहीं जब मुगल शासक भारत आए तो उन्होंने लोगों को धर्म या जिंदगी में से किसी एक को चुनने को कहा। जिन्होंने जिंदगी चुनी, उन्होंने धर्म छोड़ दिया और जिन्होंने धर्म चुना, उन्होंने जिंदगी को छोड़ दिया। ऐसा ही सिरसा के साथ हुआ है।’’ 

ज्ञानी हरप्रीत ने बताया कि उनकी कल सुबह ही सिरसा के साथ फोन पर बात हुई थी। इस दौरान उन्हें लगा कि सिरसा के सामने भी इसी तरह की पेशकश रखी गई होगी कि या तो भाजपा ज्वाइन करो या जेल जाओ। ऐसे में उन्होंने भाजपा को चुना। यह ठीक वैसा हुआ, जो मुगलों या उससे पहले आए विदेशी शासकों के दौर में हुआ। जत्थेदार ने कहा कि इसके लिए दिल्ली के वो सिख नेता भी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने सिरसा के भाजपा में शामिल होने के लिए जमीन तैयार की। यह उनकी राजनीतिक भूल भी है।

उन्होंने कहा, ‘‘कितनी हैरानी की बात है कि सिखों की सबसे बड़ी जत्थेबंदियों में से एक दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष और उनके 11 सदस्यों पर कोर्ट केस दर्ज करवाए जाते हैं और फिर उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है। यह गलत है। बेशक वे कमेटी का प्रबंध संभाल सकते हैं, लेकिन इसके लिए हमारे सिख भी जिम्मेदार हैं।’’ इस बारे में सिरसा की प्रतिक्रिया जानने के लिए उनसे बात करने की कोशिश की गई और उन्हें संदेश भी दिया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया। 


 


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