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पूर्वांचल बन रहा चिकित्सा-शिक्षा का हब, गोरखपुर में राष्ट्रपति रखेंगे आयुष विश्वविद्यालय की नींव

गोरखपुरः पूर्वांचल चिकित्सा-शिक्षा का हब बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। इस सिलसिले को मजबूत करने में 28 अगस्त के दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। इस दिन प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय की नींव रखी जाएगी गोरक्षपीठ की तरफ से स्थापित निजी विश्वविद्यालय जनता को समर्पित किया जाएगा। मुख्यमंत्री के विशेष अनुरोध पर इन विश्वविद्यालयों का शिलान्यास व लोकार्पण राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद करेंगे। दोनों ही विश्वविद्यालय विश्व विख्यात नाथपंथ के अधिष्ठाता महायोगी गुरु गोरक्षनाथ के नाम से हैं। आयुष विश्वविद्यालय के जरिए प्राचीन व पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का और विकास संभव होगा।  

इसके अलावा योगी के ही प्रयासों से गोरखपुर में एम्स भी बनकर तैयार है। गोरखपुर के भटहट ब्लॉक के पिपरी व तरकुलही में 52 एकड़ भूमि पर बनने जा रहे राज्य के पहले आयुष विश्वविद्यालय में एक ही परिसर में आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथी और योग चिकित्सा की पढ़ाई और उस पर शोध कार्य होगा। इन विधाओं से यहां चिकित्सा भी सुलभ होगी। योग सहित प्राकृतिक व परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित करने में लगी योगी सरकार का यह बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री योगी आयुष विश्वविद्यालय में आयुष कॉलेजों की संबद्धता एवं अन्य प्रशासनिक कार्य सत्र 2021-22 से एवं विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य सत्र 2022-23 से प्रारंभ करने के निर्देश पहले ही दे चुके हैं। गोरखपुर में इस विश्वविद्यालय के खुलने से पूर्वांचल की 6 करोड़ से अधिक जनता को चिकित्सा का एक और बेहतर विकल्प मिलेगा।

आयुष विद्यालय के निर्माण से किसानों को भी काफी फायदा होगा। विश्वविद्यालय की निगरानी में वह औषधीय खेती के लिए प्रेरित होंगे। विश्वविद्यालय परिसर में भी अलग से औषधीय पादप उद्यान विकसित किया जाएगा। यहां आयुष इंस्टिट्यूट व रिसर्च सेंटर भी होगा। आयुष विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य मार्च 2023 तक पूर्ण करने का लक्ष्य तय है। विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए 299.87 करोड़ रुपये की प्रारंभिक डीपीआर कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग ने बनाई है।

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