Ravindra Puri is set to be the President,

Prayagraj : अखाड़ा परिषद की बैठक में Ravindra Puri का अध्‍यक्ष बनना तय

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) : महंत नरेंद्र गिरि के ब्रह्मलीन होने के बाद जहां यह संस्था दोफाड़ हो चुकी है, वहीं अखाड़ों में अंदरूनी वैमनस्यता भी उभरी है। संगमनगरी में होने वाली बैठक में संख्या बल यह साफ कर देगी कि कौन धड़ा ताकतवर है? देश भर के संतों की नजर संगमनगरी में होने वाले फैसले पर टिकी रहेगी। इस दौरान अखाड़ा परिषद की बैठक शुरू हो चुकी है। नरेंद्र गिरि श्रीनिरंजनी अखाड़ा के सचिव थे, परंपरा के अनुसार जिस अखाड़े के महात्मा पद में रहते हुए ब्रह्मलीन होते हैं, उसी अखाड़े का दूसरा महात्मा उसी पद पर आसीन होता है। ऐसी स्थिति में श्रीनिरंजनी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी के अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावना है। 

बता दें कि इससे पहले 21 अक्टूबर को हरिद्वार के कनखल स्थित श्रीमहानिर्वाणी अखाड़ा परिसर में महानिर्वाणी तथा अटल, निर्मोही अनी, निर्वाणी अनी, दिगंबर अनी, बड़ा अखाड़ा उदासीन व निर्मल अखाड़ा ने नई कार्यकारिणी गठित कर ली। महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी अध्यक्ष व निर्मोही अनी अखाड़ा के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास महामंत्री चुने गए। दूसरे गुट ने इसे मान्यता देने से इन्कार करते हुए नई कार्यकारिणी बनाने की घोषणा की है, जिसके साथ अखाड़ों की संख्या अधिक होगी, उसका बहुमत माना जाएगा।

इस दौरान रेशम सिंह ने कोर्ट के आदेश का हवाला देकर खुद को निर्मल अखाड़ा का अध्यक्ष बताते हुए सोमवार की बैठक में शामिल होने की घोषणा की है। कहा जा रहा है कि बड़ा उदासीन सहित वैष्णव संप्रदाय के अखाड़ों के नाराज महात्मा महंत हरि गिरि को समर्थन दे रहे हैं। आने में असमर्थ कुछ महात्माओं ने लिखित रूप से समर्थन पत्र भेजा है। 

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