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Pargat Singh द्वारा उच्च शिक्षा को उत्साहित करने के लिए व्यापक खाका बनाने पर दिया जोर

चंडीगढ़ः उच्च शिक्षा क्षेत्र में सेवा निभा रहे शिक्षा शास़्त्रीयों से ज़मीनी हकीकतों संबंधी फीडबैक लेने की महत्ता पर ज़ोर देते हुए उच्च शिक्षा और भाषाएं संबंधी शिक्षा मंत्री स. परगट सिंह ने कहा है कि उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए व्यापक खाका बनाने की बहुत ज़रूरत है। इस काम के लिए अकादमिक क्षेत्र के प्रसिद्ध माहिरों और शिक्षा शास्त्रीयों के साथ निरंतर बातचीत करने के लिए एक प्रक्रिया विकसित की जानी चाहिए।

उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा पद संभालने के बाद स. परगट सिंह ने इस तर्ज़ पर प्रमुख शिक्षा शास्त्रीयों के साथ पहली मीटिंग पंजाब भवन, चंडीगढ़ में की। इस मीटिंग में राज्य के यूनिवर्सिटियों के पूर्व और मौजूदा उप कुलपतियों, प्रो. चांसलरों, प्रिंसिपल और अध्यापकों समेत लगभग 30 शिक्षा शास्त्रीयों की तरफ से उच्च शिक्षा के स्तर को भविष्य में और ऊंचा उठाने और पंजाब को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अगले स्तर पर ले जाने के लिए ज़रुरी कदमों संबंधी अपने विचार सांझे किए। मीटिंग में उच्च शिक्षा के सचिव कृष्ण कुमार, डीपीआइ (कालेज) परमजीत सिंह और सहायक डायरैक्टर (कालेज शिक्षा) डा. गुरदर्शन बराड़ भी उपस्थित थे।

गुरू नानक नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर के पूर्व वाइस चांसलर और प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्री डा. एस. पी. सिंह ने अपने काडर से संतुष्ट होने की महत्ता पर रौशनी डाली और बताया कि मौजूदा समय उच्च योग्यता प्राप्त अध्यापकों को बहुत कम वेतन दिए जा रहे हैं और उनके साथ बढ़िया व्यवहार भी नहीं किया जा रहा है। इस तरह अध्यापन केवल एक पैसा बन गया है। इसलिए यह ज़रूरी है कि अध्यापकों और अध्यापन के पेशे को पहले दर्जे का चयन बनाने के लिए इसको सुरजीत किया जाए। उन्होंने कहा कि यू.जी.सी. के वेतन स्केल बिना किसी देरी के तुरंत लागू किए जाने चाहिए।

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