Yogendra Yadav, Rewari, Haryana

कोई भी सरकार किसानों को वापिस नहीं भेज सकती: योगेन्द्र यादव

रेवाड़ी: संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर बृहस्पतिवार को रेल रोको कार्यक्रम के तहत दिल्ली-जयपुर हाइवे स्थित रेवाडी सीमा के साथ लगते जियसंहपुर खेडा बॉर्डर पर पिछले दो माह से धरना देकर बैठे किसानों ने फैसला लिया है कि वे बॉर्डर से उठकर राजस्थान व हरियाणा सीमा स्थित अजरका रेलवे स्टेशन पर जाएंगे। वहां हरियाणा-राजस्थान के किसान दिल्ली-जयपुर रेलमार्ग को जाम करेंगे। इस दौरान कई ट्रेनें भी प्रभावित हो सकती हैं।

मोर्चा के नेता रामकिशन महलावत ने कहा कि वीरवार को वे दोपहर से 12 बजे से पूर्व अजरका पहुंच जाएंगे। उनके साथ किसान नेता छगन चौधरी, संजय माधव, बलबीर सिंह छिल्लर, सुमेर जेलदार, बस्तीराम आदि भी होंगे। यह रेल रोको कार्यक्र म दोपहर 12 से सायं 4 बजे तक होगा और इस दौरान वे उपरोक्त रेलमार्ग पर धरना देकर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि उनका यह रेल रोका आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण होगा। इधर रेवाड़ी-रोहतक रेलवे लाइन पर भी पाल्हावास के पास भी धरना दिया जाएगा। इस  कार्यक्रम को लेकर रेलवे पुलिस के अलावा रेवाड़ी पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। कई अन्य रेल मार्ग पर जीआरपी व आरपीएफ के जवानों को तैनात किया गया है।

एक पखवाडा अस्पताल में भर्ती रहने के बाद बुधवार को किसान आंदोलन के नेता योगेंद्र यादव एक बार फिर दिल्ली-जयपुर हाइवे स्थित रेवाड़ी सीमा के साथ लगते जियसंहपुर खेडा बॉर्डर पर किसानों के दो माह से चल रहे धरने पर पहुंचे। उन्होंने किसान सभा को संबोधित करते हुए कहा कि उनके बारे में खूब उडाया गया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए अंडरग्राउंड हो गए हैं। दिल्ली पुलिस ने उन्हें लेकर लुकआउट नोटिस जारी किए हैं। उन्होंने पुलिस को खुली चुनौती दी कि वे सबके सामने खडे हैं, चाहे तो गिरफ्तार कर सकते हैं। वे गिरफ्तारी से डरकर भागने वाले नहीं हैं। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि 26 जनवरी को लाल किले पर जो कुछ हुआ, उस समय दिल्ली पुलिस कहां सोई हुई थी। उन्होंने कहा कि देश का यह किसान आंदोलन ऐतिहासिक आंदोलन बन चुका है और सरकार आंदोलन को बदनाम करने की घटिया हरकतें कर रही हैं। 

उन्होंने कहा कि एक महीने पहले दिल्ली के आसपास धरना चल रहा था। लेकिन अब पंचायतें हो रही हैं। जिन किसानों को बॉर्डर पर आने का मौका नहीं मिला है, उन्होंने अपने घरों से आंदोलन शुरू कर दिया है। पहली बार देश का किसान हकों के लिए जागा है। फसल कटाई का समय होने के कारण इस आंदोलन का असर 15 दिनों बाद दिखाई देगा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि चाहे मोदी हो या शाह, इनका बाप या पडदादा कोई भी हो, हिंदुस्तान की कोई भी सरकार किसानों को वापिस नहीं भेज सकती। उन्होंने कहा कि अब तीन काले कानून व एमएसपी का सवाल नहीं, किसान की पगडी का सवाल हो गया है। बुधवार को भी राजस्थान के कई जिलों से किसानों के जत्थे बॉर्डर पर समर्थन देने के लिए पहुंचे। इनमें एक महिलाओं का जत्था भी शामिल रहा।

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