Navjot Singh Sidhu

पंजाब में 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का नवजोत सिंह सिद्धू ने बताया फार्मूला

चंडीगढ़ः बिजली महकमा लेने से इंकार करने वाले पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब में बिजली संकट हल करने के लिए रोजाना ट्वीट कर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सलाह दे रहे हैं। इसी कड़ी में आज उन्होंने फिर ट्वीट कर कहा कि जब तक पंजाब विधानसभा में नए कानून के माध्यम से पीपीए को रद्द नहीं किया जाता, तब तक मुफ्त बिजली के खोखले वादों का कोई मतलब नहीं है। जब तक बिजली समझौतों के दोषपूर्ण खंड ने पंजाब के हाथ बांधे हुए हैं, तब तक 300 यूनिट मुफ्त बिजली केवल एक कल्पना है। 

उन्होंने कहा कि बिजली खरीद समझौतों के अधीन पंजाब 100% उत्पादन के लिए Fixed Charges देने के लिए मजबूर है, जबकि बाकी राज्य  80% से अधिक Fixed Charges की कोई अदायगी नहीं करते हैं। बिजली खरीद समझौतों के अधीन प्राइवेट बिजली प्लांटों को यह Fixed Charges अदा न किए जाए, इससे पंजाब में बिजली की कीमत सीधी 1.20 रुपये प्रति यूनिट कम हो जाएगी। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, बिजली समझौते पंजाब में बिजली की मांग की गलत गणना पर आधारित है। बिजली की अधिकतम मांग 13,000-14000 मेगावाट केवल 4 महीने चलती है, बाकी समय यह 5000-6000 मेगावाट तक कम हो जाती है, लेकिन बिजली खरीद समझौते  इस तरह बनाए गए है कि Fixed Charges  (13,000-14000 मेगावाट) के अनुसार ही अदा करने पड़ रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि बिजली की उच्चतम मांग के दौरान निजी बिजली संयंत्रों द्वारा अनिवार्य बिजली आपूर्ति के लिए कोई प्रावधान बिजली खरीद समझौतों में दर्ज नहीं हैं। इसलिए धान की बुआई के अवसर पर उन्होंने अपने 2 बिजली प्लांट बिना मरम्मत के ही बंद कर दिए हैं। जिसके फलस्वरुप पंजाब को अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ रही है। नुकसानदार बिजली खरीद समझौतों की पंजाब के लोगों ने हजारों करोड़ रुपये कीमत चुकाई है। बिजली खरीद समझौते होने से पहले हुई पूछताछ के गलत जवाब देने के कारण पंजाब ने 3200 करोड़ रुपये तो सिर्फ कोयला साफ करने के चार्ज के रुप में ही अदा किए हैं। 

उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों की भलाई को अलग रखकर बिजली खरीद समझौते बादलों को भ्रष्ट लाभ पहुंचाने के लिए किए गए और यह बादल परिवार के भ्रष्टाचार का एक और उदाहरण है। इस भ्रष्टाचार का खामियाजा पंजाब भुगत रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि पंजाब विधानसभा में नया कानून और बिजली खरीद समझौतों पर सफेद कागज लेकर आने से ही पंजाब को इंसाफ दिलाया जा सकता है। 

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