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Happy Krishna Janmashtami: श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बन रहा है शुभ योग, जानिए पूजा का मुहूर्त

आज देश में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस खास पर्व की तैयारियां मथुरा में बड़े जोर-शोर के साथ की जाती हैं। वहीं कोरोना महामारी के चलते भले ही इसमें पाबंदियां रहेंगी लेकिन भक्तों का उत्साह कम नही हुआ। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन बेहद खास योग बन रहा है। 



दरअसल, 101 साल बाद जयंती योग का यह अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, श्रीकृष्ण जी का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, दिन सोमवार, रोहिणी नक्षत्र व वृष राशि में मध्य रात्रि को हुआ था। वहीं चंद्रमा वर्ष राशि में रहेंगे, रोहिणी नक्षत्र का प्रवेश भी 30 अगस्त को सुबह 6 बजकर 49 मिनट पर हो चुका है। अष्टमी तिथि भी सोमवार को मध्यरात्रि 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। तत्पश्चात बाद नवमी लग जाएगी। इस प्रकार से देखें तो अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और सोमवार दिन तीनों का एक साथ मिलना दुर्लभ है। मान्यता है कि इस विशिष्ट योग में जन्माष्टमी की पूजा अगर पूरे विधि-विधान के साथ की जाए तो भगवान कृष्ण की भक्तों पर अपार कृपा बरसती है। इससे भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

जानिए पूजा का मुहूर्त 

बता दें कि जन्माष्टमी पूजा का मुहूर्त रात 12 से सुबह 12.44 बजे तक रहेगा। अष्टमी तिथि की समाप्ति 31 अगस्त को दोपहर 1.59 बजे होगी। चंद्रोदय रात 11.35 पर होगा। रोहिणी नक्षत्र की समाप्ति 31 अगस्त को सुबह 09.44 बजे होगी। जो लोग जन्माष्टमी व्रत का पारण अगले दिन करते हैं वो 31 अगस्त को सुबह 09.44 बजे के बाद व्रत खोल सकते हैं और जो लोग उसी दिन कृष्ण पूजा के बाद व्रत खोल लेते हैं वो रात 12.44 के बाद भोजन ग्रहण कर सकते हैं।