Putrada Ekadashi,dainik savera

जानिए पुत्रदा एकादशी से जुड़ी कुछ खास बातें

एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। सावन माह भगवान धीव जी को अर्पित होता है। 18 अगस्त यानि के कल पुत्रदा एकादशी मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु जी की आराधना की जाती है। इसी दिन भगवान कृष्ण जी की भी पूजा की जाती है। भगवान कृष्ण जी की पूजा करते समय संतान की कामना की जाती है। इसे पुत्र देने वाली एकादशी भी कहते हैं। जो लोग संतान सुख से वंचित हैं, उन लोगों के लिए सावन पुत्रदा एकादशी बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। 

1. श्रावण महीने की इस शुक्ल पक्ष की एकादशी को पवित्रा एकादशी भी कहते हैं। धर्मशास्त्रों में इसका नाम पुत्रदा एकादशी भी बताया गया है। इस व्रत कथा को पढ़ने तथा इसके माहात्म्य को सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है और इस लोक में संतान सुख भोगकर परलोक में स्वर्ग को प्राप्त होता है।

2. एकादशी तिथि भगवान विष्णु को प्रिय होती है। इस दिन पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। तथा सुयोग्य संतान प्राप्ति के योग बनते हैं।

3. अगर संभव हो या आपके पास गंगाजल हो तो पानी में गंगा जल डालकर ही नहाना चाहिए।

4. अगर संभव हो तो पुत्रदा एकादशी के पावन दिन व्रत अवश्य रखें। मान्यता के अनुसार इस दिन श्री विष्णु और मां लक्ष्मी के पूजन से जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है।

5. एकादशी की रात्रि में भगवान श्री विष्णु का भजन-कीर्तन अवश्य करें। इस व्रत से संतान प्राप्ति के साथ ही सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

6. इस दिन किसी के प्रति अपशब्दों का प्रयोग नहीं करें, क्रोध न करें, किसी का बुरा न सोचें और ना ही बुरा करें। और सभी के प्रति आदर-सत्कार की भावना रखें।

7. इस दिन सात्विक भोजन करें, तथा मांस-मदिरा का सेवन नहीं करें। एकादशी के दिन ब्रह्मचर्य व्रत पालन करें।

8. अपने सामर्थ्य के अनुसार एकादशी पर यह सामग्री अर्पित करें- जैसे फल-फूल, नारियल, पान, सुपारी, लौंग, बेर, आंवला आदि।

9. भोग लगाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का ही भोग लगाया जाता है तथा श्री विष्णु को प्रसाद चढ़ाते समय तुलसी को जरूर शामिल करें। ऐसा कहा जाता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग या प्रसाद ग्रहण नहीं करते हैं।

10. इस पूरे दिन निराहार रहकर सायंकाल कथा सुनने के पश्चात ही फलाहार करें। आपकी कोई विशेष इच्छा हो तो भगवान से उसे पूर्ण करने का निवेदन करें।

11. पुत्रदा एकादशी के दिन पहले भगवान को भोग लगाएं, उसके बाद ही ब्राह्मणो को दान-दक्षिणा देने के पश्चात ही भोजन ग्रहण करें।

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