Karwa Chauth,dainik savera

जानिए करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा,शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में

आज करवा चौथ का व्रत मनाया जा रहा है। इस दिन महिलाएं निर्जल व्रत रखकर अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करती हैं। ये दिन विवाहित महिलाओं के लिए बहुत ही खास होता है। इस दिन, विवाहित महिलाएं सूर्योदय से पहले ‘सरगी’ खाती हैं और बाकी दिन बिना पानी और भोजन किए व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। लेकिन कुछ कुवारी लड़किया भी इस व्रत को रखती है। आइए जानते है के कुवारी लड़कियो को इस दिन क्या करना चाहिए और अपना व्रत कैसे खोलना चाहिए। 

करवा चौथ व्रत कथा 
प्राचीन कथा के अुनसार एक गांव में करवा देवी अपने पति के साथ रहती थीं. एक दिन उनके पित नदी में स्नान करने के लिए गए. स्नान करने के दौरान मगरमच्छ ने करवा के पति का पैर पकड़ लिया और खींचकर नदी में अंदर की ओर ले जाने लगा. इस दौरान पति ने अपनी रक्षा के लिए पत्नी को पुकारा. पति की आवाज सुनकर करवा नदी के किनारे पहुंच गईं और मगरमच्छ को एक कच्चे धागे से पेड़ से बांध दिया. करवा के सतीत्व की वजह से मगरमच्छ हिल तक नहीं पाया. इसके बाद करवा ने यमराज को पुकारा और अपने पति का जीवन दान मांगा और मगरमच्छ को मृत्युदंड देने के लिए कहा. यमराज ने कहा कि मगरमच्छ की आयु अभी पूरी नहीं हुई है, लेकिन तुम्हारे पति की आयु पूरी हो गई है. यमराज की ये बात सुनकर करवा क्रोधित हो गईं और उन्होंने कहा कि यदि उनके पति के प्राणों को कुछ हुआ, तो वे शाप दे देंगी. सती के शाप से डरकर यमराज ने मगरमच्छ को यमलोक भेज दिया और करवा के पति को जीवन दान दे दिया. साथ ही करवा को सुख-समृद्धि का वर दिया और कहा 'जो स्त्री इस दिन व्रत करके करवा को याद करेगी, उनके सौभाग्य की मैं रक्षा करूंगा. कहा जाता है कि इस घटना के दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि थी. तभी से करवा चौथ का व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है.

शुभ मुहूर्त 
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि रोहिणी नक्षत्र में चांद निकलेगा और पूजन होगा. कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि इस साल 24 अक्टूबर 2021, रविवार सुबह 3 बजकर 1 मिनट पर शुरू होगी, जो अगले दिन 25 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 43 मिनट तक रहेगी. इस दिन चांद निकलने का समय 8 बजकर 11 मिनट पर है. पूजन के लिए शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर 2021 को शाम 06:55 से लेकर 08:51 तक रहेगा.

करवा चौथ व्रत की पूजा विधि 
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें. इसके बाद सरगी के रूप में मिला हुआ भोजन करें, पानी पीएं और गणेश जी की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें. इसके बाद शाम तक न तो कुछ खाना और नाहीं पीना है. पूजा के लिए शाम के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना कर इसमें करवा रखें. एक थाली में धूप, दीप, चन्दन, रोली, सिन्दूर रखें और घी का दीपक जलाएं. पूजा चांद निकलने के एक घंटे पहले शुरु कर दें. इसके बाद चांद के दर्शन कर व्रत खोलें.

 

 



Live TV

Breaking News


Loading ...