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साइकिलों के इस्तेमाल का बढ़ता प्रचलन

वैश्विक महामारी के प्रकोप के दौरान अधिकांश लोगों का ध्यान प्रकृति और अपनी सेहत की तरफ गया और दोनों ही चीज़ों को सहेज कर रखने की आवश्यकता हर व्यक्ति महसूस करने लगा है। प्रकृति को सहेजने के लिए प्रदूषण को कम करने की जिम्मेदारी सभी की है, वैसे ही स्वयं की सेहत में सुधार करने की जिम्मेदारी भी खुद व्यक्ति की ही होती है। इन दोनों ही जिम्मेदारियां का सरल, सस्ता और टिकाऊ हल है साइकिल। स्वस्थ शरीर और स्वस्थ जीवन के लिए एक्सरसाइज़ एक अहम बिंदु है और साइक्लिंग करने को एक उम्दा वर्जिश माना जाता है। वहीं साइकिल चलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी बचा जा सकता है। कम से कम ईंधन का इस्तेमाल, पर्यावरण प्रदूषण के भार को कम करता है और इंसान को प्रकृति को संजो कर रखने की जिम्मेदारी का एहसास भी कराता है।

हेल्थ से जुड़े जानकारों का मानना है कि प्रतिदिन साइक्लिंग करने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म दुरुस्त रहता है और रोज़मर्रा होने वाली जरूरी हलचल होती है, जो हृदय की सेहत के लिए भी जरूरी है। इसके साथ ही तनाव पर नियंत्रण, मांसपेशियों में मजबूती, वजन पर नियंत्रण भी किया जा सकता है। कुल-मिलाकर दिलो-दिमाग की सेहत के लिए साइकिल चलाने की सलाह दी जाती है। वहीं साइक्लिंग का अधिक इस्तेमाल करने से, ये यातायात के साधन के रुप में, दफ्तर, स्कूल और बाज़ार में जाने के लिए, घरेलू सामान की खरीदारी के लिए एक उम्दा विकल्प बन गई है।

पिछले एक-दो साल से दुनिया भर में साइकिलों की बिक्री में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। हालांकि इस वजह से साईकिलों की कीमत में भी इजाफा हुआ है। एक रेग्युलर और बिना गियर वाली साइकिल की कीमत करीब 3500 हजार रुपए या 50 डॉलर होती है, जो आम शख्स के बजट में भी होती है और इसका रख-रखाव भी कम होता है। हालांकि मध्यम श्रेणी की साइकिलें 10 से 20 हज़ार तक की हैं, जिसे ज्यादातर लोग खरीद रहे हैं, वहीं उच्च श्रेणी की साइकिलों की कीमत 30 से 40 हज़ार रुपए की है जो कि साइक्लिंग के प्रति अति गंभीर लोग ही खरीद रहे हैं। साइकिलों के हेलमेट भी अलग-अलग श्रेणियों की है लेकिन औसत हेलमेट करीब चार से पांच हजार रुपए में उपलब्ध है। वयस्कों में ही नहीं बल्कि बच्चों में भी साइकिल की डिमांड में बढ़ोत्तरी हुई है।                          

साइकिलों के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए अब नगरीय निकायों ने भी इसके प्रति संवेदनशीलता दिखाई है और सड़कों पर साईकिल लेन बनाई गई है, साथ ही साइकिलों के लिए विशेष पार्किंग भी तैयार की गई है। इसके अलावा साइकिलों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए, सस्ते किराए की दर से, साइकिलों को घंटों के हिसाब से उपयोगकर्ताओं को दिया जा रहा है ताकि लोगों को ईंधन युक्त साधनों पर कम निर्भर रहना पड़े। महानगरों में साइकिलों के ज्यादा इस्तेमाल से यातायात को सुचारू बनाने और जाम जैसे हालात को टालने में भी सहायता मिल रही है।

साइकिलों की बनावट, इसमें लगने वाले विज्ञान, नए तरह के कल-पुर्जे और सुविधाजनक सीटों में भी निरंतर सुधार आ रहा है, जिससे हर वर्ग का शख्स अपनी जेब और सुविधा के मुताबिक इसे खरीद सकता है। रख-रखाव का कम खर्च और एक व्यक्ति के लिए उपयुक्त होने की वजह से कई जगहों पर साइकिल संस्कृति ने जोर-शोर से नया आकार ले लिया है। 
(साभार----चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)


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