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पंचायतों के सोशल ऑडिट से पारदर्शिता बढ़ने के साथ तय होगी जवाबदेही: नरेंद्र सिंह तोमर

नई दिल्ली: केंद्रीय पंचायती राज, ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को पंचायती राज संस्थाओं के लिए 15वें वित्त आयोग अनुदान के सोशल ऑडिट (सामाजिक लेखा परीक्षा) हेतु गाइड लाइन जारी की। इसे ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थानने पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से बनाया है। इस अवसर पर श्री तोमर ने चालू वर्ष में शत-प्रतिशत पंचायतों के ऑनलाइन ऑडिट का लक्ष्य रखकर उसे पूर्ण करने की अपील की।

श्री तोमर ने कहा कि आज ग्राम पंचायतों के पास विकास कार्य के लिए पर्याप्त धनराशि पहुंच रही है। मनरेगा, पीएम-आवास जैसी योजनाओं के साथ ही केंद्र एवं राज्य वित्त आयोग के अनुदान से होने वाले कार्यों का क्रियान्वयन भी पंचायतों के माध्यम से होता है। पंचायतों के पास पैसों की कमी नहीं है। ऐसे में पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता आने के साथ ही जवाबदेही तय होना भी जरूरी है। पंचायती राज मंत्रालय ने लगातार इस दिशा में प्रयत्न किए हैं कि पंचायतों में सुशासन आएं और वे आदर्श पंचायतों के रूप में स्थापित हों। ई ग्राम स्वराज, ऑडिट लाइन एप्लीकेशन और सोशल ऑडिट जैसे प्रावधानों से ग्राम पंचायतों के कामकाज में पूर्ण पारदर्शिता आना तय है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद व राज्यों की विधानससभाएं तो महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं हीलेकिन देश को बुनियादी स्तर पर मजबूत बनाने में प्राथमिक सरकार के रूप में ग्राम पंचायतों की सबसे बड़ी भूमिका है। देश में 2 लाख 60 हजार से अधिक पंचायतों में 31 लाख से अधिक निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं, जिनमें महिला प्रतिनधियों की संख्या लगभग 14 लाख है। श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में आज हम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सतत गतिशील हैं। देश में एक छोर से दूसरे छोर तक बाधाएं पार करते हुए रिफार्म के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।हमारी प्राथमिक सरकार के रूप में काम करने वाली ग्राम पंचायतों को भी सशक्त और समृद्ध करने कार्य किया जा रहा है। पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने से ही गांव आत्मनिर्भर बनेंगे और इससे देश आत्मनिर्भरता के मार्ग पर आरूढ़ होगा।

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद एक लंबे कालखंड तक यह आवश्यकता महसूस की जाती रही कि पंचायतों को जितने संसाधन की आवश्यकता है, उतने उनके पास नहीं है लेकिन आज गर्व के साथ यह कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में पंचायतों को अधिकार संपन्न बनाने के साथ ही उनके भरपूर वित्तीय संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं। वित्त आयोग के कार्यों के साथ ही कई योजनाओं के क्रियान्वयन भी पंचायतों के माध्यम से हो रहा है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में पंचायतों में काम की गति तो बढ़ी ही है, पारदर्शिता और जवाबदेही में भी वृद्धि हो रही है। 


केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने कहा कि 14वें वित्त आयोग में 2 लाख 292 करोड़ रूपए पंचायतों को देने की अनुशंसा की गई थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने इस अनुशंसा को पूर्ण रूप से स्वीकार करते हुए कहा था कि जब पंचायतों में विकास होगा, तभी देश का विकास होगाऔर विगत 5 वर्षों में इस अनुदान राशि का 97 प्रतिशत हिस्सा गांवों में पहुंचाया गया है। 15वें वित्त आयोग ने भी ग्राम पंचायतों को आगामी 5साल में 2 लाख 36 हजार करोड़रू. देने की अनुशंसा की है। इसे भी सरकार ने पूर्णतः स्वीकार कर दिया है। गतवर्ष आई वित्त आयोग की अंतरिम रिपोर्ट में भी 60 हजार करोड़ रू. की अनुशंसा की गई थी, जिसे ग्राम पंचायतों को जारी कर दिया गया है। इससे गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास सुनिश्चित होगा। इस अवसर परपंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री सुनील कुमार, उपनियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक श्री आर.जी.विश्वनाथन, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थानहैदराबाद के महानिदेशक श्री जी.नरेंद्र कुमार, पंचायती राज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री चंद्रशेखर कुमार, वित्त मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री सज्जन सिंह यादव एवं केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय तथा राज्यों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे। 

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