Huknama Shri Harimandir Sahib Ji, dharam news

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 23 सितंबर

सोरठि महला ४॥ आपे कंडा आपि तराजी प्रभि आपे तोलि तोलाइआ॥ आपे साहु आपे वणजारा आपे वणजु कराइआ ॥   आपे धरती साजीअनु पिआरै पिछै टंकु चड़ाइआ ॥१॥  मेरे मन हरि हरि धिआइ सुखु पाइआ ॥   हरि हरि नामु निधानु है पिआरा गुरि पूरै मीठा लाइआ ॥ रहाउ ॥  

हे भाई! प्रभु ने खुद ही धरती पैदा की हुई है (अपनी मर्यादा रूप तराजू के) पिछले छाबे में चार मासे का तोल रख के (प्रभु ने इस सृष्टि को अपनी मर्यादा में रखा हुआ है। यह काम उस प्रभु के लिए बहुत साधारण  और आसन है)। वह तराजू भी प्रभु आप है, उस तराजू की सुई भी प्रभु आप ही है, प्रभु ने आप ही बाट(तोल) से (इस सृष्टि को ) तोला हुआ है (अपने हुकम में रखा हुआ है)। प्रभु आप ही (इस धरती पर वयापार करने वाला है) साहूकार है, आप ही (जीव-रूप हो कर) वयापार करने वाला है, व्यापार कर रहा है।१। 

हे मेरे मन! सदा परमात्मा का सुमिरन कर, (जिस किसी ने परमात्मा को सुमीरा है, उस ने) सुख  पाया  है। हे भाई! परमात्मा का नाम (सारे सुखों का खज़ाना है (जो मनुख गुरु की सरन आया है) पूरे गुरु ने उस को परमात्मा का मीठा नाम अनुभव करा दिया है।रहाउ। 

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