Hukamnama 7 August 2021 हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साह

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 7 अगस्त

सूही महला ५ ॥ साजनु पुरखु सतिगुरु मेरा पूरा तिसु बिनु अवरु न जाणा राम ॥ मात पिता भाई सुत बंधप जीअ प्राण मनि भाणा राम ॥ जीउ पिंडु सभु तिस का दीआ सरब गुणा भरपूरे ॥ अंतरजामी सो प्रभु मेरा सरब रहिआ भरपूरे ॥ ता की सरणि सरब सुख पाए होए सरब कलिआणा ॥ सदा सदा प्रभ कउ बलिहारै नानक सद कुरबाणा ॥१॥ ऐसा गुरु वडभागी पाईऐ जितु मिलिऐ प्रभु जापै राम ॥ जनम जनम के किलविख उतरहि हरि संत धूड़ी नित नापै राम ॥ हरि धूड़ी नाईऐ प्रभू धिआईऐ बाहुड़ि जोनि न आईऐ ॥गुर चरणी लागे भ्रम भउ भागे मनि चिंदिआ फलु पाईऐ ॥हरि गुण नित गाए नामु धिआए फिरि सोगु नाही संतापै ॥नानक सो प्रभु जीअ का दाता पूरा जिसु परतापै ॥२॥हरि हरे हरि गुण निधे हरि संतन कै वसि आए राम  संत चरण गुर सेवा लागे तिनी परम पद पाए राम ॥ परम पदु पाइआ आपु मिटाइआ हरि पूरन किरपा धारी ॥ सफल जनमु होआ भउ भागा हरि भेटिआ एकु मुरारी ॥ जिस का सा तिन ही मेलि लीआ जोती जोति समाइआ ॥ नानक नामु निरंजन जपीऐ मिलि सतिगुर सुखु पाइआ ॥३॥ गाउ मंगलो नित हरि जनहु पुंनी इछ सबाई राम ॥ रंगि रते अपुने सुआमी सेती मरै न आवै जाई राम ॥अबिनासी पाइआ नामु धिआइआ सगल मनोरथ पाए  ॥ सांति सहज आनंद घनेरे गुर चरणी मनु लाए ॥ पूरि रहिआ घटि घटि अबिनासी थान थनंतरि साई ॥ कहु नानक कारज सगले पूरे गुर चरणी मनु लाई ॥४॥२॥५॥


अर्थ: हे भाई! गुरु महापुरख ही मेरा असली सज्जन है उस गुरु के बिना मैं किसी और को नहीं जानता जो मुझे परमात्मा के बारे में बता सके। हे भाई! गुरु मुझे मन में इस तरह प्यारा लग रहा है, जैसे मां-बाप, पुत्र, संबंधी, जीवन, प्राण प्यारे लगते हैं। हे भाई! गुरु ने ही मुझे यह समझ दी है कि प्राण जीवन शरीर सब कुछ उस परमात्मा का दिया हुआ है। वह परमात्मा सभी गुणों से भरपूर है। ((गुरु ने ही समझ दी है,) कि हर एक के दिल ही जानने वाला मेरा वह प्रभु सब जगह व्यापक है। उसकी शरण आने से सारे सुख आनंद मिलते हैं। हे नानक! (कह गुरु की कृपा से ही) मैं परमात्मा से सदा ही सदा सदके कुर्बान जाता हूं।१। हे भाई! ऐसा गुरु बड़ी किस्मत से मिलता है जिसके मिलने से दिल में परमात्मा की सूझ पैदा हो जाती है। अनेक जन्मों के सारे पाप दूर हो जाते हैं। और हरि के संत जनों की चरणों की धूल में स्नान होता रहता है। जिस गुरु के मिलने से प्रभु के संत जनों की चरण धूल में स्नान हो सकता है, प्रभु का सिमरन हो सकता है, और बार-बार जन्म के चक्र में नहीं जाना पड़ता। हे भाई! गुरु के चरण लगकर भरम डर सब नाश हो जाते हैं। मन में फल प्राप्त हो जाता है गुरु की शरण आने से जिस मनुष्य ने सदा परमात्मा के गुण गाए हैं सदा परमात्मा का नाम सुमिरन किया है उसको फिर कोई गम कोई दुख क्लेश पकड़ नहीं सकता। हे नानक! गुरु की कृपा से समझ आती है कि जिस परमात्मा का पूरा प्रताप है वही जीवन देने वाला है।२। हे भाई! सारे गुणों का खजाना परमात्मा संत जनों के प्यार के बस में टिका रहता है। जो मनुष्य संत जनों की शरण आकर गुरु की सेवा में लगे हैं, उन्होंने सबसे ऊंचा आत्मिक दर्जा हासिल कर लिया है। उसकी जिंदगी कामयाब हो गई है। उसका हर एक डर दूर हो गया है। उसको वह परमात्मा मिल गया जो एक आप ही आप हैं। जिस परमात्मा का वह पैदा किया हुआ था उसने ही उसको अपने चरणों में मिला लिया है। उसकी जीवन परमात्मा की जोत में एक हो गई है। हे नानक! निरलेप प्रभु का सदा नाम जपना चाहिए, जिसने गुरु को मिलाकर नाम जपा है, उसने आत्मिक आनंद प्राप्त कर लिया है। हे संत जनों सदा परमात्मा की सिफत सलाह का गीत गाया करो। सिफत सलाह से परमात्मा के साथ हर एक मुराद पूरी हो जाती है। जो प्रभु जन्म मरण के चक्र में नहीं आता,  सिफत सलाह की बरकत के साथ मनुख उस मालिक के प्रेम रंग में रंगे रहते हैं। जिस मनुष्य ने परमात्मा का नाम सुमिरन किया है, उसने नाशिवंत प्रभु का मिलाप हासिल कर लिया है। उसने सभी इच्छाएं पूरी कर ली हैं। है भाई गुरु के चरण में मन जोड़कर मन शांति प्राप्त करता है, आत्मिक अडोलता के अनेकों आनंद मनाता है। सिमरन की बरकत से यह निश्चय हो जाता है की नाशरहित परमात्मा ही हर एक जगह मे, हर एक शरीर में व्याप रहा है। नानक कहते हैं, हे भाई! गुरु के चरण में मन लगा कर सारे काम सफल हो जाते हैं।

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