Hukamnama Sri Harmandir Sahib

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 29 अक्टूबर

रागु सूही असटपदीआ महला ४ घरु २ ੴ सतिगुर प्रसादि॥ कोई आणि मिलावै मेरा प्रीतमु पिआरा हउ तिसु पहि आपु वेचाई ॥१॥   दरसनु हरि देखण कै ताई ॥   क्रिपा करहि ता सतिगुरु मेलहि हरि हरि नामु धिआई ॥१॥ रहाउ ॥   जे सुखु देहि त तुझहि अराधी दुखि भी तुझै धिआई ॥२॥ 

राग सूही, घर २ में गुरु रामदास जी की आठ-बंदों वाली बाणी। अकाल पुरख एक है और सतगुरु की कृपा द्वारा मिलता है। हे भाई! अगर कोई (सज्जन) मेरा प्रीतम मेरे पास ला कर मुझे मिला देवे तो मैं उस के आगे अपना-आप बेच दूँ।१। हे प्रभु! अगर तूँ (मेरे ऊपर) कृपा करे, (मुझे) गुरु मिला दे, तो तेरा दर्शन करने के लिए मैं सदा तेरा नाम सुमिरन करता रहूँगा।१।रहाउ। हे प्रभु! (कृपा कर) अगर तू मुझे सुख दे, तो भी मैं तुझे ही सुमिरन करता रहू, दुःख में भी तेरी ही आराधना करता रहूँ।२।

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