Hukamnama 22 april हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 22 अप्रैल

सलोकु मः ३ ॥ सतिगुर ते जो मुह फिरे से बधे दुख सहाहि ॥ फिरि फिरि मिलणु न पाइनी जमहि तै मरि जाहि ॥ सहसा रोगु न छोडई दुख ही महि दुख पाहि ॥ नानक नदरी बखसि लेहि सबदे मेलि मिलाहि ॥१॥ मः ३ ॥ जो सतिगुर ते मुह फिरे तिना ठउर न ठाउ ॥  जिउ छुटड़ि घरि घरि फिरै दुहचारणि बदनाउ ॥ नानक गुरमुखि बखसीअहि से सतिगुर मेलि मिलाउ ॥२॥

जो मनुख सतगुर से मनमुख में, वेह (अंत में) बहुत दुःख सहते हैं, प्रभु को मिल नहीं सकते, बार बार पैदा होते हैं व् मरते हैं, चिंता का रोग उन्हें कभी नहीं छोड़ता, सदा दुखी रहते हैं, हे नानक, कृपा-दृष्टि वाला प्रभु यदि उनको बक्श ले तो सतगुरु के शब्द के द्वारा उन्हें मिल जाते हैं।१। जो मनुख सग्तुरु से मनमुख हैं उनकी  कोई जगह टिकाना नहीं; उनका विभ्चरण किसी छोड़ी हुई स्त्री जैसा है, जो घर घर में बदनाम होती है। है नानक! जो गुरु के सन्मुख हो के बक्शे जाते हैं, वह सतगुरु की संगत मैं मिल जाते हैं॥२.॥

Live TV

Breaking News


Loading ...