Hukamnama 10 October 2021 हुक्मनामा श्री हरिमंदिर सा

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 10 अक्टूबर

बिलावलु महला ५ ॥ सिमरत नामु कोटि जतन भए ॥ साधसंगि मिलि हरि गुन गाए जमदूतन कउ त्रास अहे ॥१॥ रहाउ ॥ जेते पुनहचरन से कीन्हे मनि तनि प्रभ के चरण गहे ॥ आवण जाणु भरमु भउ नाठा जनम जनम के किलविख दहे ॥१॥ निरभउ होइ भजहु जगदीसै एहु पदारथु वडभागि लहे ॥ करि किरपा पूरन प्रभ दाते निरमल जसु नानक दास कहे ॥२॥१७॥१०३॥

अर्थ :-हे भाई ! परमात्मा का नाम सुमिरते हुए (तीर्थ, कर्म कांड आदि) करोड़ों ही उधम (मानो) हो जाते हैं। (जिस मनुख ने) गुरु की संगति में मिल के भगवान के गुण गाने शुरू कर दिये, जमदूतों को (उस के करीब ) डर आने लग गया।१।रहाउ। हे भाई ! जिस मनुख ने भगवान के चरण अपने मन में हृदय में बसा लिए, उस ने (पिछले कर्मो के संस्कार मिटाने के लिए, मानो) सारे ही प्राश्चित कर्म कर लिए। उस का जन्म मरन का चक्र खत्म हो गया, उस का हरेक भरम डर दूर हो गया, उस के अनेकों जन्मों के किये पाप जल गए।१। (तो और, हे भाई !) निडर हो के (कर्म कांड का भरम उतार के) जगत के स्वामी-भगवान का नाम जपा करो। यह नाम-पदार्थ बड़ी किस्मत के साथ ही मिलता है। हे सर्व-व्यापक दातार भगवान ! कृपा कर, ताकि तेरा दास नानक पवित्र करने वाली तेरी सिफ़त-सलाह करता रहे।२।१७।१०३।

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