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Covid के थपेड़ों से उबरने लगी Himachal की अर्थव्यवस्था

हिमाचल की अर्थव्यवस्था कोविड के थपेड़ों से उबरने लगी है। अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने के संकेत जीएसटी संग्रहण में बढ़ौतरी से मिलने लगे हैं। आर्थिक गतिविधियों के जारी रहने से प्रदेश में जीएसटी संग्रहण में इजाफा हुआ है। बीते वित्तीय वर्ष के मुकाबले चालू माली साल की दूसरी तिमाही तक जीएसटी संग्रहण में 58 फीसदी का इजाफा हुआ है। जीएसटी संग्रहण बढ़ने से सरकार ने भी राहत की सांस ली है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में कोरोना की पहली लहर में आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप्प हो गई थी। दवा कारखानों के अलावा कुछ अन्य कारखानों में ही कोविड प्रोटोकोल की अनुपालना के बीच उत्पादन होता रहा। 

पर्यटन उद्योग को 81 फीसदी का नुक्सान हुआ। अन्य गतिविधियां भी लगभग ठप्प रही। मगर कोरोना की पहली लहर से पार पाने के बाद दूसरी लहर में सरकार ने आर्थिक गतिविधियों को जारी रखने का निर्णय लिया। इसका असर अब दिखाई देने लगा है। आबकारी एवं कराधान विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में बीते साल के सितंबर माह के मुकाबले बीते सितंबर माह में जीएसटी संग्रहण में 11 फीसदी का इजाफा हुआ है। बीते साल सितंबर माह में प्रदेश में जीएसटी संग्रहण 316.56 करोड़ था। बीते सितंबर माह में यह राशि बढ़ कर 352.69 करोड़ हो गई। 

राज्य में चालू वित्त वर्ष में अब तक कुल जीएसटी संग्रहण 2093.65 करोड़ रुपए रहा। यह बीते वित्तीय वर्ष में समान अवधि के लिए यह 1320.28 करोड़ रुपये रहा था। जाहिर है कि चालू वित्तीय वर्ष से 58 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में राज्य को जीएसटी से प्राप्त होने वाले राजस्व में निरंतर सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है।विभाग का कहना है कि राज्य में जीएसटी में सकारात्मक वृद्धि को बनाए रखने में कई महत्वपूर्ण कारक रहे हैं जिनमें उच्च आयकर दाताओं की निगरानी, फील्ड में कार्यरत कर्मियों के प्रदर्शन का आकलन, विभाग द्वारा प्रभावी प्रवर्तन संबंधी गतिविधियां तथा ई.वे बिलों का भौतिक सत्यापन इत्यादि प्रमुख है।

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